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यूपी: सरकार ने किया स्पष्ट- राजनीतिक विचारधारा नहीं होगी अयोग्यता का पैमाना, हिंसात्मक गतिविधियां होंगी अहम

Thu, 29 Oct 2026 07:44 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

UP government jobs:यूपी सरकार के नियुक्ति विभाग ने एक दिन पूर्व जारी किए गए अपने आदेश में और स्पष्टता बरती है। सरकार ने भ्रमों से दूर रहने को कहा है। 

 
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यूपी में सरकारी नौकरी के नियम। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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नियुक्ति विभाग ने उत्तर प्रदेश में सरकारी नियुक्तियों के लिए अभ्यर्थियों के चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापन से संबंधित शासनादेश को लेकर कुछ समाचार माध्यमों में प्रकाशित रिपोर्ट पर स्थिति स्पष्ट की है। विभाग के अनुसार, शासनादेश की व्याख्या करते समय इसके मूल आशय और वास्तविक प्रावधानों को समझना जरूरी है। संबंधित नियम स्पष्ट करता है कि किसी व्यक्ति को केवल उसकी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर सरकारी नियुक्ति के लिए अनुपयुक्त नहीं माना जाएगा। इसलिए इस प्रावधान को राजनीतिक विचारधारा, वैचारिक असहमति या शांतिपूर्ण विरोध के आधार पर सरकारी नौकरी से वंचित करने की व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है।

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प्रावधान में राजनीतिक विचारधारा और हिंसात्मक गतिविधियों के बीच स्पष्ट अंतर किया गया है। इसमें विशेष रूप से ऐसे संगठनों का उल्लेख है, जिनका संकल्पित उद्देश्य हिंसात्मक तरीके से समाज की विद्यमान व्यवस्था को बदलना है। ऐसे संगठनों से जुड़ाव और संबंधित गतिविधियों के मामलों में निर्धारित नियमों के अनुसार विचार किया जाएगा। इसका आशय सामान्य राजनीतिक विचारों, सरकार की आलोचना या शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक गतिविधियों को हिंसात्मक गतिविधियों के समान मानना नहीं है।

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पहले से लागू था प्रावधान, अभी बनाया गया अधिक स्पष्ट

नियुक्ति विभाग के अनुसार, सरकारी नियुक्तियों के लिए चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापन से संबंधित यह प्रावधान पहले के शासनादेश में भी शामिल था। नए शासनादेश में उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में संबंधित प्रावधानों को एक साथ संकलित करते हुए अधिक सरल, स्पष्ट और व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसका उद्देश्य नियमों को समझने, उनके एकरूप अनुपालन और सत्यापन प्रक्रिया में स्पष्टता सुनिश्चित करना है। इससे अभ्यर्थियों को प्रावधानों को समझने में सुविधा मिल सकती है और अनावश्यक भ्रम की स्थिति से बचा जा सकता है।

तीन वर्ष की अवधि के साथ सकारात्मक बदलाव का भी प्रावधान

संबंधित नियम में 21 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद जांच की तारीख से पूर्ववर्ती तीन वर्षों के दौरान ऐसी गतिविधियों में भागीदारी को व्यक्ति की सक्रिय संलग्नता का प्रमाण मानने का उल्लेख है। साथ ही, इस अवधि में व्यक्ति की प्रवृत्ति में सकारात्मक परिवर्तन के ठोस प्रमाण उपलब्ध होने की स्थिति को भी ध्यान में रखा गया है। इसलिए इस प्रावधान को केवल तीन वर्ष की अवधि का उल्लेख करके समझना पर्याप्त नहीं है; इसके सभी पहलुओं को साथ पढ़ना आवश्यक है।
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राजनीतिक असहमति और हिंसात्मक गतिविधियां दो अलग विषय

यूपी शासन का बड़ा फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक विचार रखना, सरकार की नीतियों की आलोचना करना और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना अलग विषय हैं। इन्हें हिंसात्मक तरीके से सामाजिक व्यवस्था बदलने के उद्देश्य वाली गतिविधियों के समान नहीं माना जा सकता। सरकारी सेवाओं में चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापन निर्धारित मानकों के अनुसार अभ्यर्थियों की उपयुक्तता की जांच की प्रक्रिया है। ऐसे में शासनादेश की व्याख्या उसके संपूर्ण पाठ और वास्तविक संदर्भ के आधार पर किया जाना जरूरी है, ताकि किसी प्रावधान को उसके मूल आशय से अलग करके प्रस्तुत न किया जाए और अभ्यर्थियों के बीच अनावश्यक भ्रम न फैले।
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