सिंचाई विभाग ने सरकार को बताया था कि गोमती रिवर फ्रंट के लिए 357.68 करोड़ रुपये की जरूरत है। इसके बावजूद सरकार ने 2017-18 के लिए 250 करोड़ का ही प्रावधान किया है।
यानी 107 करोड़ रुपये कम दिए गए हैं। यह रकम जनेश्वर पार्क के निकट गोमती के हिस्से में काम करवाने के लिए यह रकम दी गई है। ‘पॉडिंग रेग्युलेशन’ करने पर अधिकतम पैसा खर्च किया जाएगा।
यहां पहले से बन रहे रबर डैम को तैयार करके यह पॉडिंग करवाई जाएगी। विभाग के मुख्य अभियंता संग्राम सिंह ने मांग पत्र में 24 करोड़ रबर डैम के लिए, 83 करोड़ डायफ्रॉम वॉल के लिए, क्षतिग्रस्त अंडरपास के लिए 6.50 करोड़, 40 लाख भूमि अर्जन, 9.28 करोड़ अतिरिक्त पानी की उपलब्धता,3.60 करोड़ हरियाली रखरखाव, 44 करोड़ म्यूजिकल फाउंटेन, 3.30 करोड़ रबर डैम के निकट हरियाली, 9 करोड़ पावर सब स्टेशन निर्माण और 92.60 करोड़ सेंटेज चार्ज के रूप में मांगे गए।
लखनऊ से गुजरने वाले सभी हाईवे को शहरी सीमा से बाहर जोड़ने केलिए बन रहे आउटर रिंग रोड का एक भाग खुद प्रदेश सरकार की संस्था पीडब्ल्यूडी को बनाना है।
शारदा नहर के साथ-साथ करीब 14 किमी. की लंबाई में पीडब्ल्यूडी को नहर के दोनों तरफ तीन-तीन लेन का निर्माण करना है। इस काम को तेज करने के लिए 40 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।
स्मारक समिति के पार्को के लिए 130 करोड़
डेमो
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स्मारक समिति के अधीन अंबेडकर पार्क, ईको पार्क, कांशीराम स्मारक, रमाबाई अंबेडकर मैदान सहित दूसरे स्थलों के प्रबंधन, रखरखाव के साथ कर्मचारियों के वेतन के लिए 130 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
अखिलेश सरकार में इसके लिए 280 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। हालांकि बाद में रिवाइज कर 212 करोड़ रुपये कर दिया गया। 31 जुलाई से शुरू हो रहे सीजी सिटी में बने संस्कृति स्कूल के संचालन के लिए सरकार ने 27.22 करोड़ रुपये दिए हैं।
वहीं स्कू ल की बिल्डिंग का निर्माण पूरा करने के लिए अलग से 25 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। यह बजट अनुदान के रूप में सीएसआई एजूकेशन सोसाइटी को मिलेगा।
लखनऊ मेट्रो के लिए कुल 233 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इसमें 135.05 करोड़ रुपये केंद्रीय करों के भुगतान के लिए दिए गए हैं। वहीं 15 करोड़ रुपये जमीन के लिए सब-ऑर्डिनेट कर्ज केरूप में दिया गया है। अंशपूंजी निवेश के लिए भी 82.95 करोड़ रुपये लखनऊ मेट्रो को मिला है।
सुल्तानपुर रोड स्थित सीजी सिटी परियोजना में अब भी सड़क बनाने और मूलभूत सुविधाओं के विकास कार्य अधूरे हैं। कामों को पूरा करने के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण को बजट की जरूरत थी। ऐसे में प्रदेश सरकार ने कर्ज के रूप में प्राधिकरण को 150.05 करोड़ रुपये दिए हैं। इस बजट से मूलभूत सुविधाओं के कामों को पूरा किया जाएगा।
जनेश्वर पार्क के लिए कोई बजट नहीं
जनेश्वर मिश्र पार्क
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गोमतीनगर में बन रहे जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर के कामों की भले ही जांच चल रही हो, पर इसके अधूरे काम को पूरा करने केलिए बजट में 36.20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार ने इससे साफ संकेत दिया है कि प्रोजेक्ट नहीं रोका जाएगा।
वहीं अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, गोमतीनगर को अनुदान : 2.45 करोड़ रुपये, लखनऊ के अवस्थापना विकास के लिए : 20 करोड़ रुपये का बजट मिला।
पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार में शुरू कराए गए प्रोजेक्ट को या तो पैसा नहीं मिला या बजट में कटौती कर दी गई। जनेश्वर पार्क के कामों को पूरा करने केलिए कोई बजट नहीं दिया।
कॉर्पस फंड से आने वाले ब्याज से ही काम चलाना होगा। वहीं हुसैनाबाद, शान-ए-अवध को भी बजट नहीं मिला। जेपीएनआईसी का काम पूरा करने के लिए बाकी 76 करोड़ रुपये में से सिर्फ 36 करोड़ रुपये ही दिए गए।