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कासगंज हिंसा पर सरकार और विपक्ष में रार, 'विहिप, बजरंग दल ने किया सुनियोजित हमला'

Fri, 09 Feb 2018 08:23 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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यूपी विधानसभा (फाइल फोटो)
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विधानसभा में शुक्रवार को शून्य प्रहर में विपक्ष की ओर से काम रोको प्रस्ताव के जरिये कासगंज हिंसा का मामला उठाया गया। नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी व सपा के नितिन अग्रवाल ने कहा कि कुछ लोगों ने तिरंगा यात्रा की आड़ में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की।

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आजादी की लड़ाई हिंदू-मुसलमान दोनों ने लड़ी, दोनों संप्रदायों के लोग फांसी पर चढ़े लेकिन आज सरकार भेदभाव कर रही है। उन्होंने घटना का सिलसिले वार ब्यौरा देते हुए ये हिंदू-मुस्लिम दंगा नहीं था बल्कि विहिप व बजरंग दल के लोगों ने सुनियोजित तरीके से मुसलमानों पर हमला किया, उन्हें मारापीटा तथा उनकी दुकानों और घरों को जलाया।

पुलिस ने भी तांडव किया। जिन्हें गिरफ्तार किया गया उन्होंने गोली नहीं चलाई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का खुलासा क्यों नहीं किया जा रहा? महिलाओं के साथ अभद्रता की, नौजवानों व बुजुर्गों को पकड़ा।
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चौधरी ने कहा कि उनके पास वहां की सीडी व सीसीटीवी की फुटेज है जिसे देखा जा सकता है। यह देश में आग लगाने व वर्ग संघर्ष कराने की साजिश है। सिटिंग जज ही निष्पक्ष जांच कर सकते हैं।

इस पर सत्ता पक्ष की ओर से टोकाटाकी होने लगी तो चौधरी ने कहा कि इसी से अंदाजा लगा लीजिए कि वहां क्या स्थिति रही होगी। संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने नेता प्रतिपक्ष पर गलत भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए कहा कि माहौल तो आप खराब कर रहे हैं।

बसपा के लालजी वर्मा व सुखदेव राजभर तथा कांग्रेस के अजय कुमार लल्लू ने भी कासगंज हिंसा के लिए सरकार, भाजपा व उसके सहयोगी संगठनों को जिम्मेदार ठहराते हुए सिटिंग जज से जांच कराने की मांग की।

बसपा सदस्यों ने आरोप लगाया कि 2019 के चुनाव में फायदा उठाने के लिए प्रदेश को सांप्रदायिकता की आग में झोंका जा रहा है। झंडा फहराना फैशन हो गया है। सच तो यह है ऐसे लोग झंडे का अपमान करते हैं।

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संसदीय कार्य मंत्री ने दिया जवाब

यूपी विधानसभा
संसदीय कार्य मंत्री ने कासगंज की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि वहां वर्षों से परंपरागत रूप से निकाली जानी वाली तिरंगा यात्रा के रास्ते को अवरुद्ध करने की वजह घटना का मुख्य कारण बनी। न तो पहले से कोई सांप्रदायिक तनाव था और न ही विवाद।

सिर्फ यात्रा को रोकने की प्रतिक्रिया में यह घटना हुई। उन्होंने विपक्ष के सभी आरोपों को नकारते हुए कहा कि घटना पर नियंत्रण के लिए सरकार ने त्वरित कदम उठाया। घटना में मरने वाले युवक चंदन के परिजनों को मुआवजा दिया गया।

सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। किसी निर्दोष को परेशान नहीं करेगी। खन्ना के जवाब के बाद कासगंज के भाजपा विधायक देवेंद्र प्रताप सिंह बोलने खड़े हुए तो सपा सदस्य विरोध करते हुए वेल में आ गए। हंगामा होने पर अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने करीब 1.45 बजे सदन की कार्यवाही पहले 10 मिनट के लिए स्थगित की।

तीन बार स्थगन की अवधि बढ़ाई गई। 3.10 बजे फिर कार्यवाही शुरू हुई तो खन्ना ने कासगंज हिंसा की एसआईटी से जांच की घोषणा करते हुए कहा कि अब पुलिस जांच नहीं करेगी। एसआईटी को हिदायत दी गई है कि वह दूध का दूध, पानी का पानी करे।

एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर सरकार दोषियों पर कार्रवाई करेगी। सिटिंग जज से जांच कराने की मांग न माने जाने पर सपा, बसपा और कांग्रेस के सदस्यों ने बारी-बारी से सरकार पर निष्पक्ष जांच से भागने का आरोप लगाते हुए सदन का बहिष्कार कर दिया। नेता प्रतिपक्ष ने संसदीय कार्य मंत्री पर गलतबयानी का भी आरोप लगाया।
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