संसदीय कार्य मंत्री ने कासगंज की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि वहां वर्षों से परंपरागत रूप से निकाली जानी वाली तिरंगा यात्रा के रास्ते को अवरुद्ध करने की वजह घटना का मुख्य कारण बनी। न तो पहले से कोई सांप्रदायिक तनाव था और न ही विवाद।
सिर्फ यात्रा को रोकने की प्रतिक्रिया में यह घटना हुई। उन्होंने विपक्ष के सभी आरोपों को नकारते हुए कहा कि घटना पर नियंत्रण के लिए सरकार ने त्वरित कदम उठाया। घटना में मरने वाले युवक चंदन के परिजनों को मुआवजा दिया गया।
सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। किसी निर्दोष को परेशान नहीं करेगी। खन्ना के जवाब के बाद कासगंज के भाजपा विधायक देवेंद्र प्रताप सिंह बोलने खड़े हुए तो सपा सदस्य विरोध करते हुए वेल में आ गए। हंगामा होने पर अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने करीब 1.45 बजे सदन की कार्यवाही पहले 10 मिनट के लिए स्थगित की।
तीन बार स्थगन की अवधि बढ़ाई गई। 3.10 बजे फिर कार्यवाही शुरू हुई तो खन्ना ने कासगंज हिंसा की एसआईटी से जांच की घोषणा करते हुए कहा कि अब पुलिस जांच नहीं करेगी। एसआईटी को हिदायत दी गई है कि वह दूध का दूध, पानी का पानी करे।
एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर सरकार दोषियों पर कार्रवाई करेगी। सिटिंग जज से जांच कराने की मांग न माने जाने पर सपा, बसपा और कांग्रेस के सदस्यों ने बारी-बारी से सरकार पर निष्पक्ष जांच से भागने का आरोप लगाते हुए सदन का बहिष्कार कर दिया। नेता प्रतिपक्ष ने संसदीय कार्य मंत्री पर गलतबयानी का भी आरोप लगाया।