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24 लाख नौकरी पेशा श्रमिक परिवारों के इलाज का हक पुख्ता करेगी सरकार, अनुपूरक से मदद की तैयारी

Wed, 10 Jun 2020 09:21 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
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डॉक्टर इलाज करते हुए (फाइल फोटो ) - फोटो : पीटीआई
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प्रदेश सरकार 24 लाख नौकरी पेशा श्रमिक परिवारों के इलाज का हक सुनिश्चित करेगी। अभी श्रमिक और नियोक्ता 1400 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष अदा करते हैं, लेकिन 1750 रुपये प्रति व्यक्ति इलाज की सुविधा तक नहीं मिल रही है। 
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कोविड-19 महामारी से उपजे हालात के बाद श्रमिकों की समस्याओं को लेकर सरकार गंभीर है। सरकार ने श्रमिकों का हक सुनिश्चित करने का फॉर्मूला तैयार किया है। आगामी अनुपूरक बजट में जरूरी धन की व्यवस्था की तैयारी है।

प्रदेश के 41 जिलों में कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) योजना लागू है। इसमें बीमित श्रमिकों व उनके परिवार के सदस्यों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इस योजना का लाभ उन प्रतिष्ठानों के कार्मिकों को मिलता है जहां कम से कम 10 कर्मचारी हैं और कर्मचारी 21,000 से कम वेतन पा रहे हैं। 
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योजना के लाभ के लिए श्रमिकों के वेतन से 0.75 प्रतिशत तथा सेवायोजक से श्रमिकों के वेतन का 3.25% अनुदान केंद्र सरकार के कर्मचारी राज्य बीमा निगम के खाते में जमा किया जाता है। इस तरह नियोक्ता व कर्मचारी मिलकर कर्मी के वेतन का 4% अंशदान करते हैं। 

बीमांकित श्रमिकों व सेवायोजक की ओर से अंशदान के रूप में राज्य बीमा निगम के खाते में 1400 करोड़ रुपये जमा हो रहा है। निगम ने प्रति  वर्ष प्रति बीमांकित 3000 रुपये खर्च के लिए तय किए हैं। इसमें 1250 रुपये प्रशासनिक व्यय व 1750 रुपये गैर प्रशासनिक व्यय (चिकित्सा सुविधा) के लिए हैं। 

प्रदेश में 23,58,766 बीमांकित श्रमिक हैं। इनमें से 9,92,892 कर्मचारी राज्य बीमा निगम के नोएडा स्थित औषधालयों से संबद्ध हैं। बाकी 13,65,874 को राज्य सरकार द्वारा चिकित्सा सुविधा दी जाती है। नोएडा के औषधालयों से संबद्ध बीमांकितों को छोड़कर बाकी बीमांकित व उनके आश्रितों के चिकित्सा हितलाभ के लिए 409.76 करोड़ की आवश्यकता होती है।

लेकिन कई वर्षों से रकम की व्यवस्था नहीं हो रही है जिससे श्रमिकों की मुसीबत बढ़ती जा रही है। अफसरों ने बजट की कमी में प्रशासनिक खर्च में खास कटौती नहीं की। हाल के तीन वर्षों में कटौती का सबसे बुरा प्रभाव इलाज के आवंटन पर पड़ा है। 

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए सोमवार को उच्च स्तर पर एक बैठक हो चुकी है। सरकार प्रत्येक श्रमिक और उसके परिवार के इलाज के लिए पुख्ता व्यवस्था करने जा रही है।
 

इस तरह समझें संकट

वित्त वर्ष 2020-21 के बजट में इस योजना के लिए  243.58 करोड़  रुपये की मांग की गई थी। लेकिन व्यवस्था सिर्फ 174.66 करोड़ की हुई। राज्य कर्मचारी बीमा निगम ने प्रति बीमांकित 3000 रुपये खर्च करने की अनुमति दी है। 

पर, स्वीकृत बजट 3000 रुपये की तुलना में 1278.69 रुपये हैं। इसमें प्रशासनिक खर्च के लिए तय सीलिंग 1250 प्रति बीमांक के सापेक्ष 1119.68 व गैर प्रशासनिक व्यय चिकित्सा सुविधा के लिए तय सीलिंग 1750 रुपये के सापेक्ष केवल 159.01 रुपये प्रस्तावित है। ऐसे में श्रमिकों व उनके परिवारों के इलाज के लिए बजट न के बराबर है। 

श्रमिकों के इलाज के 3010 दावे लंबित 
कर्मचारी राज्य बीमा निगम ने चिकित्सा खर्च के प्रतिपूर्ति के भुगतान के लिए वर्ष 2000 में क्षेत्रीय निदेशक कर्मचारी राज्य बीमा निगम कानपुर में एक रिवॉल्विंग फंड की स्थापना हुई थी। इससे गैर प्रशासनिक सीलिंग 1750 में से 200 रुपये रोक ली जाती थी और दावों का भुगतान सीधे बीमितों के बैंक अकाउंट में कर दिया जाता था। 

निगम ने पूरे देश में रिवॉल्विंग फंड की व्यवस्था समाप्त कर दी और 25 जून 2019 से रिवॉल्विंग फंड से प्रतिपूर्ति दावों के भुगतान पर रोक लगा दी। निगम ने सरकार से कहा कि वह राज्य बजट से दावों के भुगतान की व्यवस्था करे, निगम उसकी प्रतिपूर्ति करेगा। 
 

बजट से पर्याप्त व्यवस्था न होने से बीती 30 अप्रैल तक 8.6 करोड़ रुपये के 3010 दावे भुगतान के लंबित हैं। निगम योजना में बीमांकित श्रमिकों की चिकित्सा सुविधा पर हुए खर्च की प्रति तिमाही राज्य सरकार को प्रतिपूर्ति कर देती है। इस तरह राज्य सरकार पर कोई वित्तीय भार नहीं आता है। लेकिन बजट प्रावधान न होने से मुश्किल बढ़ गई।  

बजट अभाव में इलाज में सहूलियत का प्रस्ताव अटका 
राज्य में बढ़े बीमांकितों के सापेक्ष कर्मचारी राज्य बीमा अस्पतालों व औषधालयों में संसाधनों की काफी कमी है। कर्मचारी राज्य बीमा निगम के निर्देश पर शासन ने निजी अस्पतालों व पैथालॉजी से समझौता कर सेकेंडरी केयर उपचार सुविधा कैशलेस आधार पर उपलब्ध कराने का निर्णय किया था। इसके लिए 11 दिसंबर 2019 को इस अनुबंध को मंजूरी भी दे दी गई। लेकिन बजट व्यवस्था न होने से इसका क्रियान्वयन भी अटका है।
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तीन वर्षों में इस तरह स्वीकृत हुई रकम, कैसे हो इलाज

2018-19  प्रशासनिक     गैर प्रशासनिक (चिकित्सा सुविधा)
जरूरत    1250    1750    
प्राविधान    932.20    159.86
2019-20
जरूरत    1250    1750
प्राविधान    1017.49    159.50
2020-21
 जरूरत    1250    1750
प्राविधान    1119.68    159.01 
नोट: धनराशि प्रति बीमांक प्रति वर्ष रुपये में
 
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