मोहनलालगंज में छठवीं के छात्र यश के ऑनलाइन गेम खेलने की लत ने उसके परिवार को न केवल आर्थिक रूप से तोड़ दिया, बल्कि जीवन भर का दर्द भी दे गया। इससे पहले वर्ष 2022 में पीजीआई इलाके में मोबाइल गेम खेलने से रोके जाने पर एक किशोर ने मां की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
केजीएमयू के मनोचिकित्सक पवन कुमार गुप्ता का कहना है कि अगर कोई बच्चा चार घंटे से ज्यादा मोबाइल पर समय बिता रहा है तो वह लती हो सकता है। लत बढ़ती है तो बच्चे गेम और वास्तविक जीवन में अंतर करना छोड़ देते हैं। इसे गेमिंग डिसऑर्डर कहते हैं। इसकी पहचान बहुत आवश्यक है।
केजीएमयू के मनोरोग विभाग की ओपीडी में रोजाना चार से पांच बच्चे मोबाइल की लत वाले आते हैं। विभाग की डॉ. पूजा माहौर के अनुसार, एक शोध के मुताबिक मोबाइल की लत की वजह से दिमाग में केमिकल का असंतुलन बढ़ रहा है। इससे भावनात्मक नियंत्रण नहीं हो पा रहा है।