मेरठ के हस्तिनापुर को मिला अधिक फायदा
गंगा एक्सप्रेसवे से सबसे अधिक लाभ पाने वाले क्षेत्रों में मेरठ जिले का हस्तिनापुर है। महाभारत काल से जुड़ा हस्तिनापुर जैन धर्म का भी प्रमुख तीर्थस्थल है। यहां योगी सरकार 15 करोड़ रुपये से अधिक की एकीकृत पर्यटन विकास परियोजना चला रही है।
बेहतर सड़क संपर्क से दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। पाण्डेश्वर महादेव मंदिर, करण मंदिर, उल्टा खेड़ा उत्खनन स्थल और हस्तिनापुर वन्यजीव अभ्यारण्य जैसे स्थल अब नई पहचान पाएंगे। संभल क्षेत्र को भी इस परियोजना से नई ऊर्जा मिलेगी। यहां विकसित हो रहे कुरुक्षेत्र तीर्थ स्थल तक पहुंच आसान होने से धार्मिक पर्यटन को बल मिलेगा।
यह मार्ग धार्मिक तथा प्राकृतिक पर्यटन को एक साथ जोड़ता है
हापुड़ के ब्रजघाट गढ़मुक्तेश्वर, बुलंदशहर के अवंतिका देवी मंदिर, अमरोहा के वासुदेव मंदिर, बदायूं के श्रीरामचंद्र विराजमान मंदिर और शाहजहांपुर के परशुराम मंदिर जैसे स्थलों को भी इस कॉरिडोर से बड़ा लाभ मिलेगा। बागपत के लाक्षागृह जैसे ऐतिहासिक स्थलों के पर्यटन महत्व में भी वृद्धि होगी।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में हरदोई के वनेश्वर महादेव मंदिर, उन्नाव के नवाबगंज इको-टूरिज्म क्षेत्र, रायबरेली के चामुंडा शक्तिपीठ, प्रतापगढ़ के मां ज्वाला देवी धाम और प्रयागराज तक यह मार्ग धार्मिक तथा प्राकृतिक पर्यटन को एक साथ जोड़ता है। प्रयागराज ब्लैकबक रिजर्व जैसे स्थलों तक पहुंच आसान होने से पर्यावरण पर्यटन को भी गति मिलेगी।
इको-टूरिज्म स्थलों को प्रदान करेगा नई ऊर्जा
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि गंगा एक्सप्रेस-वे के शुरू होने से पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच आवागमन आसान होगा। यह एक्सप्रेस-वे जैन सर्किट, महाभारत सर्किट और 'कल्कि धाम' संभल के अतिरिक्त मार्ग के आसपास के इको-टूरिज्म स्थलों को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा।
उन्होंने कहा, गंगा एक्सप्रेस-वे अब केवल एक सड़क नहीं, यह एक सपने की मूर्त अभिव्यक्ति है। गंगा एक्सप्रेस वे से मेरठ और प्रयागराज की दूरी 10-12 घंटे से घटकर महज 5 घंटे रह जाने की उम्मीद है। मेरठ से एक्सप्रेस-वे की शुरुआत होगी जो हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ होते हुए प्रयागराज में समाप्त होगी।