फर्जी जीएसटी फर्म बनाकर कारोबारियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) बेचकर 2.75 करोड़ की कर चोरी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ साइबर सेल, सर्विलांस टीम और इटौंजा पुलिस की संयुक्त टीम ने किया है। पुलिस ने गिरोह के चार लोगों को गिरफ्तार किया, जबकि सरगना भागा चल रहा है। पुलिस टीमें उसकी तलाश में जुटी हैं।
डीसीपी के मुताबिक, तबस्सुम ने बताया कि उसकी पहली शादी एजाज अहमद से हुई थी। एजाज ने उसे बेच दिया था। फिर कानपुर में उसने नरेंद्र से शादी की। 2017 में उसके शादीशुदा होने की जानकारी होने पर नरेंद्र ने उसे छोड़ दिया।
डीसीपी ने बताया कि तबस्सुम और प्रशांत ऐसे लोगों की तलाश करते जो फर्जी फर्म बनवाने के लिए आधार, पैन कार्ड, मोबाइल नंबर, बैंक खाते जैसे दस्तावेज देने के लिए तैयार हो जाते थे। इन दस्तावेज को वे अम्मार को देते थे। आरोपियों ने कुल 16 फर्मों का पंजीकरण कराया था।
इनमें से एक फर्म का मालिक दौलतराम को बनाया गया था, जो कानपुर की फैक्टरी में मजदूर है। अम्मार दोनों को प्रति फर्म के हिसाब से एक लाख रुपये देता था। अम्मार जीएसटी का रजिस्ट्रेशन, फर्जी किरायानामा और इन्हीं फर्जी फर्माें की आईटीसी जनरेट करता था। इन्हीं फर्जी फर्मों के जरिये कारोबारी कर चोरी करते थे।