इंटरनेट कॉल के माध्यम से संपर्क में रहते हैं सभी
पूछताछ में आरोपी चालक कुलदीप यादव ने पूछताछ पर बताया कि जीतू श्रीवास्तव के कहने पर उड़ीसा के मलखानगिरी से गांजा लाते है। गांजे को लखनऊ लाने के लिए चालक बिना बॉडी वाले ट्रेलर ट्रक का इस्तेमाल करते है जिसकी चेसिस के ऊपर बने प्लेटफार्म में गुप्त कैविटी बनी है जिसमें आसानी से 5 से 8 कुंतल गांजा छुपाकर लाते है। ट्रेलर में बॉडी न होने से किसी को भी शक नहीं होता है।
जब गाड़ी में गांजा लोड हो जाता है, तो आरोपी अपना मोबाइल नंबर बंद करके लखनऊ के लिए निकलते है। जीतू ने बताया गया है कि उड़ीसा से निकलने के बाद नंबर का प्रयोग न करके इंटरनेट काल के माध्यम से वह लोग आपस में संपर्क करते हैं। आरोपी तक 15-20 बार उड़ीसा से गांजा मंगवा चुके है।
लखनऊ, सीतापुर, बाराबंकी, गोंडा और बहराइच सप्लाई होता है गांजा
जीतू श्रीवास्तव ने पूछताछ करने पर बताया कि वह, मयंक श्रीवास्तव उर्फ सूरज, रमन, पारितोष त्रिपाठी व जसवंत शर्मा उर्फ डोरेमॉन के साथ मिलकर गांजे की तस्करी का काम करता है। यह लोग लखनऊ, सीतापुर, बाराबंकी, गोंडा, बहराइच व अन्य जिलों से मांग के अनुसार गांजा मंगवाते है। पेमेंट क्लियर होने के बाद यह निर्धारित तिथि पर ट्रक व ड्राइवर की व्यवस्था कर उन्हें उड़ीसा प्रांत माल लाने भेजा जाता है।
लखनऊ सीमा में ट्रक के आने पर आरोपी अपनी गाड़ी से ट्रक के आगे-आगे चल कर पहले से चिन्हित किए गए ठिकाने पर लेकर आते हैं और माल उतारकर फिर उसको अन्य जनपदों में सप्लाई किया जाता है। आरोपी जीतू ने बताया कि तस्करी की रकम से उन लोगों ने एक डाला और एक कार भी खरीदी है। एसटीएफ की टीम इस गैंग के अन्य सदस्यों के बारे में पता लगा रही है और उनकी गिरफ्तारी में जुटी है।