पूर्व मंत्री और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां को सरकारी लेटर पैड और मुहर का प्रयोग कर आरएसएस, भाजपा और शिया नेता कल्बे जवाद की मानहानि के आरोप मामले में एमपी एमएलए कोर्ट के विशेष एसीजेएम आलोक वर्मा ने आरोपों से बरी कर दिया।
वादी अल्लामा जमीर नकवी ने पूर्व मंत्री आजम खां के खिलाफ एक फरवरी 2019 को हजरतगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया गया कि 2014 में आजम खां के लेटरहेड पर जारी छह पत्रों में आरएसएस के साथ-साथ शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद और उनके निजी सचिव इमरान नकवी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां थीं।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि सपा सरकार में मंत्री के पद पर रहते हुए आजम ने अपने आधिकारिक लेटर हेड और आधिकारिक मुहर का दुरुपयोग किया। उन्होंने इनका इस्तेमाल न केवल भारत में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को बदनाम करने के लिए किया।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि घटना वर्ष 2014 की है, लेकिन सरकार के प्रभाव के चलते वादी की रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। इसपर वादी ने अल्पसंख्यक आयोग को शिकायत भेज कर आरोप लगाया कि आजम सरकारी लेटर हेड एवं सरकारी मोहर का दुरुपयोग करके भाजपा, आरएसएस एवं मौलाना कल्बे जवाद नकवी को बदनाम कर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छवि धूमिल करके प्रतिष्ठा को घोर आघात पहुंचा रहे हैं।