दरअसल, भानवी की ओर से दाखिल इस अर्जी को विशेष एसीजेएम कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश न देकर उसे परिवाद के रूप में पंजीकृत करने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ भानवी की ओर से सत्र न्यायालय के समक्ष निगरानी याचिका दायर की गई थी। इसका निस्तारण करते हुए एमपी एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ने विशेष सीजेएम की कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने आदेश दिया कि निचली अदालत प्रार्थना पत्र पर फिररो सुनवाई करते हुए विधि सम्मत आदेश पारित करे। बताया गया कि एमपी एमएलए कोर्ट के आदेश के खिलाफ अक्षय प्रताप सिंह ने उच्च न्यायालय में निगरानी याचिका दायर कर एमपी एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश की ओर से पारित आदेश को रद्द किए जाने का अनुरोध किया था। हालांकि, उच्च न्यायालय ने अक्षय प्रताप सिंह की याचिका को 26 मार्च को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने सत्र न्यायालय के आदेश की पुष्टि कर दी थी। इसी के बाद विशेष एसीजेएम कोर्ट ने अक्षय प्रताप सिंह, रोहित कुमार सिंह, अनिल सिंह एवं रामदेव यादव सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया है।