- घरेलू लोहे के सिलेंडर का वजन 15 किलो और गैस 14.50 किलो होने पर कुल वजन करीब 30 किलो होता था। फाइबर बॉडी सिलेंडर में 10 किलो गैस और पांच किलो का सिलेंडर होगा।
- वजन कम होने की वजह से महिलाएं भी इसे आसानी से उठा सकेंगी और एक जगह से दूसरी जगह ले जा सकेंगी।
- अभी तक 14.50 किलो की कीमत 890 ली जाती थी। यानी एक किलो का मूल्य 61.37 रुपये हुए। ऐसे में 10 किलो का मूल्य करीब 613.70 रुपये लिया जाएगा। समय-समय पर मूल्य निर्धारण के हिसाब से कीमत बढ़ेगी अथवा घटेगी।
- फाइबर बॉडी सिलेंडर पूरी तरह से पारदर्शी है। इसमें यह दिखता रहेगा कि अभी सिलेंडर में कितनी गैस बची है?
- इस सिलेंडर की बनावट मॉर्डन किचेन को ध्यान में रखकर किया गया है। इसमें पुराना रेगुलेटर भी लग सकेगा। रेगुलेटर प्वाइंट को आकर्षक बनाया गया है।
- लोहे के सिलेंडर में आग लगने पर वह ब्लास्ट होता था। ऐसे में पूरा घर प्रभावित होने की आशंका रहती थी। फाइबर सिलेंडर पिघलकर नष्ट हो जाएगा।
- यह देखने में सुंदर है। इसमें कई रंग भी है। फाइबर होने के नाते पूरी तरह से जंग प्रतिरोधी होगा।
- इन दोनों में पुराना वाला रेग्युलेटर लगेगा। इसमें आप आसानी से देख सकेंगे कि सिलेंडर में कितनी गैस बची हुई है। फिलहाल 10 किलोग्राम वाले सिलेंडर में पुराने सिलेंडर के मुकाबले लगभग 4 किलो गैस कम आएगी।
प्रदेश में पीएनजी का भी दायरा तेजी से बढ़ रहा है। राजधानी लखनऊ की गोमती नगर, इंद्रा नगर सहित कई कालोनियों में लोगों के किचन तक पाइप लाइन पहुंच गई हैं। अकेले लखनऊ में करीब 20 हजार से ज्यादा कनेक्शन् हैं। प्रदेश में वर्ष 2023 तक 1.05 करोड़ कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया है।