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UP : बिजली बिल, पैन और आधार से फर्जी जीएसटी पंजीकरण, दूसरे के दस्तावेज से छेड़छाड़ कर बनाई जा रही फर्में

Mon, 03 Nov 2025 05:06 PM IST
आकाश द्विवेदी अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

इसके बाद फर्म को सक्रिय कर फर्जी बिलिंग नेटवर्क तैयार किया जाता है। एक फर्म से दूसरे फर्म को फर्जी बिल बनाकर भेजा जाता है, जिससे कागज़ों पर करोड़ों का व्यापार दिखता है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobestock
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विस्तार
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जीएसटी में फर्जी पंजीकरण कर सरकार को अरबों रुपये का चूना लगाने वाले जालसाजों का देशभर में फैला सिंडीकेट अब जीएसटी अधिकारियों के रडार पर है। जांच में खुलासा हुआ है कि जालसाज बिजली बिल, पैन और आधार कार्ड जैसे संवेदनशील दस्तावेजों में फोटोशॉप के जरिए हेराफेरी कर फर्जी जीएसटी रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं। 

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इस नेटवर्क की जड़ें 23 राज्यों तक फैली बताई जा रही हैं, जबकि लखनऊ में दर्ज एक फर्म के पते से कई ऐसे फर्जी पंजीकरणों का सुराग मिला है, जिनमें इस्तेमाल हुए दस्तावेज पूरी तरह किसी और के नाम पर हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, अब तक की जांच में करीब 80 प्रतिशत फर्मों में दूसरों के दस्तावेजों जैसे बिजली बिल, आधार, पैन और यहां तक कि संपत्ति की रजिस्ट्री की फोटोकॉपी का उपयोग किया गया है। 

इन फर्जी फर्मों को खोलने के बाद जालसाज इनवॉइस आधारित फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का खेल शुरू करते हैं। यानी बिना किसी असली लेनदेन या माल की आपूर्ति के केवल बिलिंग के माध्यम से करोड़ों रुपये का टैक्स क्रेडिट क्लेम किया जाता है, जिससे सरकार को भारी राजस्व नुकसान होता है।

कैसे चलता है फर्जी पंजीकरण का खेल

इस सिंडीकेट की शुरुआत इंटरनेट से बिजली बिल और पहचान पत्रों के स्कैन कॉपी चोरी करने से होती है। उसके बाद फोटोशॉप या अन्य सॉफ्टवेयर से नाम, पता या फोटो में मामूली बदलाव कर इन्हें “नए दस्तावेज़” की तरह इस्तेमाल किया जाता है। इसी आधार पर पोर्टल पर जीएसटी में नया पंजीकरण कराया जाता है। मोबाइल नंबर और ईमेल भी फर्जी या अस्थायी (डमी) दिए जाते हैं, ताकि कोई सत्यापन कॉल या ओटीपी न मिले।

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इसके बाद फर्म को सक्रिय कर फर्जी बिलिंग नेटवर्क तैयार किया जाता है। एक फर्म से दूसरे फर्म को फर्जी बिल बनाकर भेजा जाता है, जिससे कागज़ों पर करोड़ों का व्यापार दिखता है। असल में न तो कोई माल बिकता है, न कोई सेवा दी जाती है, लेकिन टैक्स क्रेडिट के नाम पर सरकार से वसूली हो जाती है।

उत्तर प्रदेश में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर

उत्तर प्रदेश में बीते एक वर्ष में राज्य कर (स्टेट जीएसटी) और केंद्रीय कर (सीजीएसटी) विभागों ने मिलकर करीब 2,500 से अधिक फर्जी फर्मों का पता लगाया है। इन फर्मों के माध्यम से लगभग 1,800 करोड़ से अधिक की कर चोरी का अनुमान है। केवल लखनऊ, नोएडा, कानपुर और वाराणसी जैसे औद्योगिक जिलों में ही 700 से ज्यादा फर्में फर्जी पाई गई हैं।

इन पंजीकरणों में जो दस्तावेज सबसे ज्यादा फर्जी पाए गए हैं, उनमें बिजली बिल (60%), आधार कार्ड (55%), पैन कार्ड (50%) और रजिस्ट्री की फोटोकॉपी (40%) शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि कई मामलों में जालसाजों ने बिना किसी भौतिक सत्यापन के ही ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी कर ली।

कार्रवाई और चेतावनी राज्य कर विभाग ने अब सभी जिलों में डिजिटल वेरीफिकेशन और फिजिकल इंस्पेक्शन को अनिवार्य कर दिया है। वहीं, जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) पोर्टल पर भी दस्तावेज अपलोड के दौरान फेस ऑथेंटिकेशन और लाइव लोकेशन टैगिंग जैसे फीचर लागू किए जा रहे हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह अब केवल टैक्स चोरी का मामला नहीं रहा, बल्कि डेटा सुरक्षा और साइबर अपराध का बड़ा खतरा बन चुका है।

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