पुलिस को देखकर कई युवतियां रोने लगीं
पुलिस के मुताबिक, मंगलवार रात में छापा मारकर सभी से पूछताछ शुरू की गई। ऑपरेशन मैनेजर ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार शुरू में पुलिस को गुमराह करते रहे। उधर, पुलिस को देखकर कई युवतियां रोने लगीं। बड़ी संख्या में महिला पुलिस को बुलाया गया। मंगलवार देर रात शुरू हुई छानबीन बुधवार शाम तक चलती रही। ललित और विक्रम ने गिरोह के सरगना समेत कुछ बड़े लोगों के नाम लिए हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। लखनऊ पुलिस बृहस्पतिवार को पूरे मामले के बारे में जानकारी देगी।
खुद को बताते थे एफबीआई अधिकारी
यूएस में बैठे गिरोह के जालसाजों ने वहां की कंपनियों के टोल फ्री नंबर डुप्लीकेट बना रखे थे। इसे इंटरनेट पर वायरल कर दिया था। जैसे ही कोई व्यक्ति टोल फ्री नंबर तलाश कर उसपर फोन करता था तो वीओआईपी सिस्टम के जरिये उनकी कॉल समिट बिल्डिंग स्थित सेंटर पर ट्रांसफर हो जाती थी।
इसके बाद टेली कॉलर्स सक्रिय हो जाते थे और बातचीत से लोगों को अपने जाल में फंसा लेते थे। गिरोह के लोग खुद को एफबीआई अधिकारी बताकर पाेर्नोग्राफी के मामले में जेल भेजने की धमकी देते थे। फर्जी कॉल सेंटर से बरामद डिजिटल उपकरण और दस्तावेजों की पुलिस फोरेंसिक जांच कराएगी।
24 घंटे पुलिस, फिर भी नहीं लगी भनक
समिट बिल्डिंग में पुलिस चौकी भी बनाई गई है। खास बात ये है कि वहां पर आए दिन होने वाले हुड़दंग के कारण अतिरिक्त पुलिस भी तैनात रहती है। बावजूद इसके बिल्डिंग में फर्जी कॉल सेंटर चलता रहा और पुलिस को भनक नहीं लगी। बुधवार को जब सभी को हिरासत में लेकर पुलिस निकली तो वहां बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई।
गिरोह ने जानबूझकर समिट बिल्डिंग में फर्जी कॉल सेंटर खोला था। दरअसल, समिट में वीकेंड के अलावा भी आम दिनों में भीड़ रहती है। बड़ी संख्या में युवा वहां पार्टी करने जाते हैं। यही वजह है कि सरगना को समिट बिल्डिंग में दफ्तर खोलना फायदेमंद लगा।
दिनभर जमे रहे अफसर, बसों में भरकर भेजे गए आरोपी
फर्जी कॉल सेंटर के भंडाफोड़ के बाद बड़ी संख्या में पुलिस अफसर वहां पहुंचे। पुलिस मुख्यालय से भी अफसरों की टीम वहां पहुंची और कॉल सेंटर के बारे में छानबीन की। पूरे दिन वहां पर पुलिसकर्मियों का जमावड़ा लगा रहा। समिट बिल्डिंग को खाली करा दिया गया। इसके बाद हिरासत में लिए गए लोगों को वहां से निकाला गया। सभी को बस में बिठाकर मेडिकल परीक्षण के लिए भेज दिया गया।