कैडवर डोनेशन यानी ब्रेन डेड के मरीजों से अंग दान में लेकर प्रत्यारोपण बढ़ाने की जरूरत है। इसमें ब्रेन डेड या मृत्यु के छह से 10 घंटे के अंदर परिजनों से दान में मिले अंग लेकर जरूरतमंदों में प्रत्यारोपण किया जाता है। इसके लिए जागरूकता बढ़ाई जा रही है।
एसजीपीजीआई में सर्वाधिक किडनी प्रत्यारोपण हो रहा है। अब जिलों में डायलिसिस की सुविधा मिल गई है। इससे कुछ राहत मिली है।
जीवनशैली सुधारें: लोहिया संस्थान के कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. भुवन चंद्र तिवारी बताते हैं कि खराब जीवन शैली, वायु प्रदूषण, तनाव, मधुमेह सहित अलग-अलग कारणों से हार्ट के मरीज बढ़ रहे हैं। प्रदेश में हर दिन 10 से 15 हजार मरीज पहुंचते हैं। हर साल करीब पांच हजार मरीजों को हृदय प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ती है। अब प्रत्यारोपण शुरू हुआ है तो पंजीयन से वास्तविक डाटा सामने आएगा।
क्या है रास्ता: प्रदेश में हर साल करीब 23 हजार लोग सड़क हादसे में जान गंवाते हैं। यदि इसमें से 10 फीसदी परिवार अंगदान कर दें तो हर साल कम से कम 2300 को लिवर और 4600 किडनी मरीजों को जीवनदान दिया जा सकता है। ब्रेन डेड होने वाले मरीज के अंग को लेकर पीड़ित मरीज में प्रत्यारोपित किया जा सकता है।