विद्युत नियामक आयोग ने टैरिफ आदेश में स्पष्ट किया है कि निगमों पर उपभोक्ताओं का इस वर्ष भी 18592 करोड़ सरप्लस निकल रहा है, लेकिन बिजली कंपनियों की हालत खराब है। ऐसे में बिजली दरें कम नहीं की जा सकती है।
प्रदेश में विद्युत उपभोक्ता परिषद की ओर से निगमों पर उपभोक्ताओं के 33122 करोड़ सरप्लस के एवज में बिजली दरें कम करने की मांग की जा रही है। इस वर्ष भी 18592 करोड़ रुपये का सरप्लस है। ऐसे में कुल करीब 51 हजार करोड़ रुपये सरप्लस है। ऐसे में करीब 13 फीसदी बिजली दरें कम करने की मांग की गई। जबकि पाॅवर कार्पोरेशन ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 45% और औसत 28% वृद्धि का प्रस्ताव आयोग को भेजा।
ऐसे में विद्युत नियामक आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि बिजली कंपनियों की खराब वित्तीय स्थिति की वजह से इस वर्ष बिजली दरों में कमी नहीं की जा सकी है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि उपभोक्ता परिषद के 90% आंकड़े आयोग ने स्वीकार कर लिए, जबकि करोड़ों रुपये लेकर पाॅवर कार्पोरेशन के लिए तैयार किए गए कंसलटेंट के आंकड़ों को पूरी तरह खारिज कर दिया गया।