विधानसभा में उस समय सन्नाटा पसर गया, जब विधानसभा अध्यक्ष ने घोषणा कर दी कि जिस दिन 403 में से एक भी विधायक मेरे प्रति अविश्वास जताएगा तो मैं उसी दिन पद छोड़ दूंगा। महाना ने कहा कि जब तक मैं इस पीठ पर बैठा हूं, तब तक सदन नियम से चलेगा। कोई सदस्य इसके विपरीत आचरण करेगा तो मैं उसके खिलाफ कार्रवाई जरूर करुंगा। उन्होंने कहा कि मैं जिस जाति से आता हूं, उस जाति का कोई वोट बैंक नहीं है। मैं सभी जातियों के समर्थन से ही चुनाव में जाता हूं और सभी विधायकों की सर्वसम्मति से ही मुझे पीठ पर बिठाया गया है, इसलिए नियम से सदन का संचालन मेरी जिम्मेदारी है।
दरअसल मंगलवार को एक विधायक ने मीडिया के सामने विधानसभा अध्यक्ष पर सरकार के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया था। बुधवार को सपा के बागी विधायक मनोज पांडेय ने विधानसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि संसदीय परंपरा में पीठ का सम्मान सर्वोच्च है। इसके बावजूद जिस तरह से एक विधायक द्वारा पीठ पर टिप्पणी की गई है, वह सदन की गरिमा के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि इस मामले में सदस्य के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। पांडेय ने विधायक द्वारा उठाए गए मुद्दे को एथिक्स कमेटी को भी सौंपे जाने की मांग रखी। सपा के डाॅ. संग्राम यादव और महबूब अली ने भी पीठ पर आरोप लगाने को गलत बताते हुए पीठ के प्रति समर्थन व्यक्त किया।
विधायक संग्राम ने साधा मनोज पर निशाना
विपक्ष की एक विधायक द्वारा पीठ पर आरोप लगाए जान के मुद्दे पर चर्चा के दौरान सपा के संग्राम यादव ने अपने ही दल के बागी विधायक पर भी निशाना साधा। संग्राम ने पीठ के खिलाफ टिप्पणी की आलोचना तो की, लेकिन मनोज पांडेय का नाम लिए बगैर तंज कसा कि जनता को बीच में धोखा देने वालों के मुंह से संसदीय लोकतंत्र की बातें शोभा नहीं देती हैं। इस पर मनोज पांडेय ने भी कहा कि रामचरित मानस जलाने वालों पर भी भरोसा नहीं है।