यूपी में बिजली का निजीकरण का विरोध।
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नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इम्प्लॉइज एंड इंजीनियर्स के संयोजक प्रशांत चौधरी ने कहा कि निजीकरण का फैसला वापस न लिया गया तो पूरे देश के 27 लाख से अधिक अभियंता अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू कर देंगे। सभी संगठनों ने लिखित में समर्थन दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी बिजली कर्मचारी का उत्पीड़न करने की कोशिश की गयी तो इसकी भी तीखी प्रतिक्रिया होगी।
नई परियोजनाएं उत्पादन निगम को मिलें
बिजली पंचायत में मांग की गई कि ओबरा ‘डी’ और अनपरा ‘ई’ परियेजना का कार्य उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम को सौंपा जाए। 25 जनवरी 2000 के समझौते के तहत सभी विद्युत वितरण निगमों को मिलाकर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद लिमिटेड का पुनर्गठन किया जाए।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति और उपभोक्ता परिषद के एक मंच पर आने से निजीकरण के विरोध की लड़ाई रोचक हो गई है। पंचायत के दौरान तय किया गया कि अब सभी 42 जिलों में निजीकरण के विरोध में बिजली रथ निकाल कर बिजली पंचायत की जाएगी।
नोएडा, आगरा सहित अन्य प्रांतों में निजीकरण फेल
बिजली पंचायत में श्रम संगठनों के पदाधिकारियों ने दावा किया कि निजीकरण का प्रयोग ग्रेटर नोएडा, आगरा और देश के अन्य प्रान्तों में पूरी तरह विफल हो चुका है। उन्होंने कहा कि पांच अप्रैल 2018 और छह अक्टूबर 2020 को वित्त मंत्री सुरेश खन्ना एवं तत्कालीन ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा के साथ हुए लिखित समझौते हुआ था, जिसमें कहा गया कि प्रदेश में विद्युत वितरण निगमों की वर्तमान व्यवस्था में ही विद्युत वितरण में सुधार के लिए कर्मचारियों और अभियन्ताओं को विश्वास में लेकर ही सार्थक कार्यवाही की जाएगी। इसके बाद भी कार्पोरेशन प्रबंधन ने इस समझौते का उलंघन करते हुए निजीकरण का मसौदा तैयार कर दिया।
बटेंगे तो बिकेंगे, एक हैं तो सेफ हैं का नारा
विभिन्न स्थानों से आए अभियंता व अन्य कार्मिक हाथ में नारे लिखे तख्तियां लिए हुए थे। वे बढ़ेंगे तो बटेंगे तो बिकेंगे और एक हैं तो सेफ हैं का नारा लगा रहे थे। इस दौरान अभियंताओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुहार लगाने वाले और ऊर्जा मंत्री के विरोध में भी नारेबाजी की।