प्रियंका गांधी वाड्रा व अजय कुमार लल्लू।
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विधानसभा चुनाव के नतीजे आने से पहले कांग्रेस के नेता आश्चर्यजनक परिणाम आने का दावा कर रहे थे। हुआ भी यही। किसी ने नहीं सोचा था कि पार्टी का इतना खराब प्रदर्शन रहेगा। आंदोलनों से अपनी पहचान बनाने वाले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू भी अपनी सीट नहीं बचा सके। उन्हें तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। कांग्रेस के हिस्से महज ढाई फीसदी वोट और दो सीटें आईं।
वर्ष 2017 के चुनाव में कांग्रेस ने 7 सीटें जीती थीं। ये सीटे थीं-तमकुहीराज, रामपुर खास, कानपुर कैंट, बेहट, सहारनपुर, रायबरेली सदर और हरचंदपुर। इनमें सिर्फ तमकुहीराज, रामपुर खास और कानपुर कैंट से जीते प्रत्याशी ही कांग्रेस के साथ रहे। शेष चार ने पाला बदल लिया। पाला बदलने वालों में रायबरेली सदर से वर्ष 2017 में जीतीं सिर्फ अदिति सिंह ही दुबारा भाजपा के टिकट पर जीतने में सफल रहीं।
दो बार के विधायक रहे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू भी तमकुहीराज से पराजित हुए। इसी तरह से कानपुर कैंट से सोहेल अंसारी को भी कांग्रेस के टिकट पर दुबारा जीत नहीं मिली। वर्ष 2017 में रामपुर खास से कांग्रेस के टिकट पर जीतीं आराधना मिश्रा ‘मोना’ ही सिर्फ इस बार अपनी सीट बचाने में सफल रहीं। इसके अलावा फरेंदा से पार्टी प्रत्याशी वीरेंद्र चौधरी जीते।
राजनीति के जानकारों का कहना है कि कांग्रेस वर्ष 2017 का चुनाव सपा के साथ मिलकर लड़ी थी। उसके रणनीतिकारों को उम्मीद थी कि इस बार अकेला लड़कर वह बेहतर मत प्रतिशत हासिल कर सकती है। लेकिन, उसकी एकला चलो की यह नीति पूरी तरह से फ्लॉप साबित हुई। जनता का संदेश साफ है कि निकट भविष्य में यूपी कांग्रेस के लिए कोई खास संभावना वाला प्रदेश नहीं है।