यूपी से लोकसभा में ब्राह्मण-कुर्मी बराबर हैं। पासी और ठाकुर दूसरे स्थान पर हैं। परंपरागत वोटबैंक पासी, निषाद और कुर्मी के खिसकने से भाजपा को बड़ा नुकसान हुआ है।
उत्तर प्रदेश से लोकसभा में ब्राह्मण और कुर्मी बिरादरी की भागीदारी बराबर है, जबकि ठाकुर और पासी बिरादरी के सदस्य दूसरे स्थान पर रहेंगे। मुस्लिमों की संख्या पांच रहेगी। सियासी जानकारों का मानना है कि भाजपा के कोर वोटबैंक में शामिल पासी, निषाद और कुर्मी में सेंध लगने से पार्टी को जोरदार झटका लगा है।
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हालांकि संविधान और आरक्षण के सवाल पर दलित वर्ग की अन्य जातियां भी भाजपा के बजाय सपा-कांग्रेस की ओर कदम बढ़ा दी हैं। यही वजह है कि पिछले चुनाव की अपेक्षा भाजपा का वोटबैंक करीब नौ फीसदी खिसक गया है। सपा और कांग्रेस इसी फार्मूले को निरंतर धार देने की तैयारी में हैं। ऐसे में भाजपा को नई रणनीति बनानी होगी।
उत्तर प्रदेश से लोकसभा की 80 सीटें हैं। इसमें कांग्रेस को छह, सपा को 37, भाजपा को 33 और उसके सहयोगी अपना दल को एक, रालोद को दो एवं आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) को एक सीट मिली है। सभी दलों से जीतने वाले उम्मीदवारों में सर्वाधिक 11- 11 ब्राह्मण एवं कुर्मी हैं। जबकि ठाकुर और पासी बिरादरी के सात- सात सदस्य लोकसभा पहुंचे हैं।
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लोकसभा में उत्तर प्रदेश से कुर्मी और पासी बिरादरी की संख्या बढ़ने की वजह इंडिया गठबंधन (सपा- कांग्रेस) की बदली रणनीति है। सपा ने जहां यादव-मुसलमानों के टैग से बाहर निकलते हुए नया समीकरण बनाया, वहीं कांग्रेस ने ब्राह्मणों के बजाय अन्य जातियों की भागीदारी बढ़ाई। कांग्रेस ने 17 सीटों में 20-20 फीसदी की हिस्सेदारी पिछड़े, दलित एवं अल्पसंख्यकों को दी।
सीतापुर से पूर्व मंत्री नकुल दुबे का टिकट काट कर राकेश राठौर को उम्मीदवार बनाने के पीछे भी यही रणनीति थी, जो सफल रही। सपा ने फैजाबाद (अयोध्या) सामान्य सीट पर पासी बिरादरी के अवधेश प्रसाद को उम्मीदवार बनाया और यह सीट भाजपा से छीन ली। हालांकि मेरठ में भी सामान्य सीट पर दलित उम्मीदवार उतारा था, लेकिन वहां हार का सामना करना पड़ा।
क्या कहते हैं जानकार
सपा ने 4 मुस्लिम और 5 यादव को मैदान में उतारा और सभी जीत गए। पिछड़े वर्ग में लोधी, निषाद, कुर्मी सहित भाजपा के कोर वोटबैंक वाली जातियों के प्रत्याशी को मैदान में उतार कर विश्वास जगाया। आरक्षण और जाति जनगणना का मुद्दा धरातल तक पहुंचाया, जिसका परिणाम रहा कि भाजपा को मुंह की खानी पड़ी। संत कबीर नगर से संजय निषाद के पुत्र प्रवीण निषाद और घोसी से ओमप्रकाश राजभर के पुत्र अरविन्द राजभर को हार का सामना करना पड़ा है। पार्टी ने इस मिशन को निरंतर चलया तो एकजुटता बनी रहेगी। - रामलौटन निषाद, राष्ट्रीय प्रवक्ता, भारतीय ओबीसी महासभा
बुलंद हुआ मथुरा न काशी, अयोध्या में अवधेश पासी
समाजवादी छात्रसभा के राष्ट्रीय महासचिव मनोज पासवान कहते हैं कि इस बार का नारा मथुरा न काशी, अयोध्या में अबकी अवधेश पासी पूरी तरह से सफल रहा है।
इस नारे की बदौलत अयोध्या संसदीय सीट सहित मंडल की सुल्तानपुर, अम्बेडकर नगर, बाराबंकी और अमेठी में इंडिया गठबंधन को जीत मिली। इसे निरंतर जारी रखा जाएगा। क्योंकि पासी बिरादरी मतदाता भाजपा से छिटक कर इंडिया गठबंधन के साथ आ गए हैं।