2012 के चुनाव में कानपुर नगर की 10 विधानसभा सीटों में से सपा ने पांच पर परचम लहराया था, वहीं भाजपा के खाते में चार सीटें आई थीं। कांग्रेस के हिस्से में किदवईनगर की इकलौती सीट आई थी।
किदवई नगर : कांग्रेस को इकलौती सीट बचाने की चुनौती
मौजूदा कांग्रेस विधायक अजय कपूर यहां सपा-कांग्रेस गठबंधन से चुनाव मैदान में हैं। वहीं, भाजपा ने सपा सरकार में मंत्री रह चुके महेशचंद्र त्रिवेदी को प्रत्याशी बनाया है। वे ब्राह्मण बहुल इस सीट पर सपा-कांग्रेस प्रत्याशी को कड़ी टक्कर देते दिख रहे हैं। बसपा ने संदीप कुमार को मैदान में उतारा है जो पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। इस विधानसभा क्षेत्र का ज्यादातर हिस्सा शहरी इलाके में आता है। नौकरीपेशा लोगों की अधिकता है। पिछले चुनाव में यहां दो हजार से कुछ ज्यादा मतों से ही हार-जीत हुई थी।
गोविंद नगर : व्यापारी-नौकरीपेशा के हाथ में बाजी
मौजूदा भाजपा विधायक सत्यदेव पचौरी एक बार फिर भगवा परचम फहराने के लिए मैदान में हैं। वहीं कांग्रेस ने अंबुज शुक्ला को टिक ट दिया है। बसपा ने निर्मल तिवारी को प्रत्याशी बनाया है। पिछड़ी और ब्राह्मण बहुल इस सीट पर कई नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। व्यापारी वर्ग, नौकरीपेशा लोगों की मिली-जुली इस सीट पर सिंधी और पंजाबी समुदाय के मतदाता भी अपना दखल रखते हैं।
कैंट : भाजपा को सीट बचाने की चुनौती
मिलिट्री एरिया के साथ ही इसमें कई ग्रामीण इलाके भी आते हैं। बिजली-पानी के साथ ही यहां सिविलियन को उनकी जमीनों के मालिकाना हक का विवाद भी चल रहा है। गठबंधन के बावजूद यहां सपा-कांग्रेसप्रत्याशियों में काफी खींचतान रही। दो दिन पहले सपा प्रत्याशी मो. हसन रूमी के चुनाव मैदान से हटने के बाद कांग्रेस के सोहिल अख्तर अंसारी गठबंधन के उम्मीदवार हैं। ऐसे में भाजपा प्रत्याशी और मौजूदा विधायक रघुनंदन सिंह भदौरिया का तनाव बढ़ गया है। बसपा के नसीम अहमद भी मुस्लिम वोटों में सेंध लगाने में जुटे हैं।
सीसामऊ : रोमांचक होगा मुकाबला
यहां से मौजूदा सपा विधायक हाजी इरफान सोलंकी सपा-कांग्रेस गठबंधन के प्रत्याशी हैं। वहीं भाजपा ने सुरेश अवस्थी को मैदान में उतारा है। बसपा ने नंदलाल कोरी को प्रत्याशी बनाया है। मुस्लिम और हिंदू मतदाताओं की संख्या यहां करीब बराबर ही है। भाजपा के साथ इस सीट पर संघ का भी काफी जोर है, जबकि कांग्रेसियों के साथ आने से सपा भी मजबूत दिख रही है। यहां दलित और पिछड़ी जातियों के मतदाताओं की संख्या भी अच्छी खासी है। ऐसे में यहां मुकाबला काफी रोमांचक हो गया है।
आर्यनगर : व्यापारी और मुस्लिम तय करेंगे बाजी
पिछले कई चुनावों से यह सीट भाजपा के पास है। मौजूदा विधायक सलिल विश्नोई एक बार फिर कमल खिलाने के लिए उतरे हैं। सपा-कांग्रेस गठबंधन से सीएम अखिलेश यादव के चहेते अमिताभ बाजपेई सपा से मैदान में हैं। बसपा ने अब्दुल हसीब को प्रत्याशी बनाया है, जो पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। इस क्षेत्र में व्यापारियों की संख्या सबसे ज्यादा है। ऐसे में व्यापारी और मुस्लिम मतदाता ही बाजी तय करेंगे।
कल्याणपुर : पिछड़े और दलित लिखेंगे किस्मत
मौजूदा सपा विधायक सतीश कुमार निगम सपा-कांग्रेस गठबंधन से मैदान में हैं। भाजपा ने नीलिमा कटियार और बसपा ने दीपू कुमार को प्रत्याशी बनाया है। दोनों ही पिछड़ी जाति से हैं और पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं सपा प्रत्याशी सामान्य वर्ग से हैं। कुछ ग्रामीण और ज्यादा शहरी क्षेत्र के साथ ही औद्योगिक इलाके का हिस्सा भी इसमें आता है। पिछड़ी और दलित मतदाता यहां प्रत्याशियों की जीत-हार में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
महाराजपुर : सपा-कांग्रेस दोनों के ही प्रत्याशी डटे
2012 में परिसीमन के बाद कैंट क्षेत्र के कुछ हिस्से और सरसौल विधानसभा क्षेत्र को मिलाकर नई सीट महाराजपुर बनी। यहां से मौजूदा भाजपा विधायक सतीश महाना दुबारा भगवा फहराने के लिए मैदान में उतरे हैं। सोसाइटी क्षेत्र और ग्रामीण क्षेत्र इस सीट की पहचान है। गठबंधन के बावजूद यहां कांग्रेस से पूर्व सांसद राजाराम पाल और और सपा से पूर्व विधायक अरुणा तोमर दोनों ही मैदान से डटे हैं। बसपा ने ब्राह्मण प्रत्याशी मनोज कुमार को मैदान में उतारा है।
बिठूर : तीनों प्रमुख दलों में मुकाबला
सपा के मौजूदा विधायक मुनींद्र शुक्ला यहां सपा-कांग्रेस गठबंधन से मैदान में हैं। वहीं, भाजपा ने पिछली बार यहां से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले अभिजीत सिंह सांगा पर दांव खेला है। बसपा ने घाटमपुर से दो बार विधायक रहे डॉ. रामप्रकाश कुशवाहा को प्रत्याशी बनाया है। ग्रामीण क्षेत्र की यह विधानसभा सीट टूरिस्ट प्लेस होने की वजह से भी चर्चा में भी रहता है। यहां बसपा, भाजपा और कांग्रेस-सपा गठबंधन के प्रत्याशियों के बीच जबरदस्त टक्कर है।
घाटमपुर : कांग्रेस को टक्कर दे रहीं दो महिला प्रत्याशी
2012 में यहां सपा के इंद्रजीत कोरी विजयी रहे थे। इस बारगठबंधन की वजह से सपा ने यह सीट कांग्रेस के लिए खाली कर दी। कांग्रेस ने यहां नंदराम सोनकर को प्रत्याशी बनाया है। भाजपा से कमला रानी और बसपा से सरोज कुरील चुनाव मैदान में हैं। इस सुरक्षित सीट पर तीनों के बीच कड़ी टक्कर देखी जा रही है। ग्रामीण क्षेत्र की सीट होने की वजह से यहां सिंचाई और जल निकासी बड़ी समस्या है, जिसे प्रत्याशियों ने मुद्दा बना रखा है।
बिल्हौर : त्रिकोणीय मुकाबले के आसार
इस सुरक्षित सीट पर 2012 के चुनाव में यहां सपा की अरुणा कुमारी कोरी जीती थीं, जिन्हें इस बार रसूलाबाद से टिकट दिया गया है। यहां सपा-कांग्रेस गठबंधन से पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवकुमार बेरिया साइकिल निशान के साथ मैदान में हैं। भाजपा ने सपा सरकार में मंत्री रहे भगवती प्रसाद सागर को प्रत्याशी बनाया है। बसपा से कमलेश चंद्र दिवाकर मैदान में हैं। यहां त्रिकोणीय मुकाबला नजर आ रहा है।