कंपनी पर ये हैं आरोप
कंपनी पर आरोप है कि बिना सामान की असल आवाजाही के जाली इनवॉइज और ई-वे बिल के जरिये फर्जी आईटीसी बनाने और उसे आगे पास करने में शामिल थी। जांच में कई फर्जी या अस्तित्वहीन कंपनियों के जरिये बड़े पैमाने पर सर्कुलर ट्रांजेक्शन, फंड की तेजी से लेयरिंग और कैश निकालने की बात सामने आई है।
जांच में जीएसटी अधिकारियों ने पाया था कि 9.63 करोड़ रुपये का आईटीसी गलत तरीके से लिया गया और 10.28 करोड़ रुपये का आईटीसी आगे पास किया गया। इससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। अब ईडी अपराध से अर्जित कंपनी की कमाई से खरीदी गई चल-अचल संपत्तियों का पता लगाकर उन्हें जब्त करेगी।
मुजफ्फरनगर दंगे के बाद बसपा ने निकाला था
बता दें कि शाहनवाज राणा को बसपा ने सपा सरकार में हुए मुजफ्फरनगर दंगे के दौरान दिल्ली की लड़कियों से दुष्कर्म के मामले में पार्टी से बाहर कर दिया था। इसके बाद उन्होंने कई दलों में शरण ली। वहीं, 5 दिसंबर 2024 को जीएसटी के अधिकारियों ने शाहनवाज राणा के ठिकानों पर छापा मारा था और अधिकारियों से अभद्रता करने पर शाहनवाज राणा, पूर्व सांसद कादिर राणा के बेटे, दो बेटियों समेत कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया था।
पुलिस द्वारा शाहनवाज राणा आदि पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई भी गई थी। उनकी संपत्तियों को कुर्क करने की कवायद भी शुरू की गई थी। शाहनवाज पर जेल में रहने के दौरान मोबाइल का इस्तेमाल करने और जेलर को धमकाने की एफआईआर भी दर्ज हुई थी। पुलिस ने उनकी हिस्ट्रीशीट भी खोली थी।