डिजिटल होगी मॉनिटरिंग व्यवस्था
पूरी व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाया जाएगा। सभी बिक्री केवल डिजिटल पीओएस प्रणाली के माध्यम से होगी। एआई आधारित सीसीटीवी निगरानी, यूपीआई एवं कार्ड भुगतान, क्यूआर कोड आधारित ग्राहक फीडबैक और डिजिटल मॉनिटरिंग व्यवस्था अनिवार्य होगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और सेवा गुणवत्ता पर लगातार नजर रखी जा सकेगी।
एआर-वीआर तकनीक से प्रदेश की विरासत का मिलेगा अनुभव
डबल डेकर फूड ट्रक की संरचना भी इसे खास बनाएगी। इसकी छत पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे, जिससे ऊर्जा की खपत कम होगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। ट्रक का ऊपरी हिस्सा पर्यटकों के लिए अत्याधुनिक अनुभव केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
यहां एआर और वीआर तकनीक के माध्यम से उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहर, पर्यटन स्थलों और जैव विविधता का डिजिटल अनुभव मिलेगा। बिना हेडफोन के इमर्सिव ऑडियो, एलईडी आधारित डिजिटल हेरिटेज गैलरी और आरामदायक ईको डाइनिंग लाउंज इसकी विशेषता होगी।
डिजिटल मेन्यू सहित अन्य आकर्षण
निचले हिस्से को पूरी तरह आधुनिक व्यावसायिक रसोई के रूप में विकसित किया जाएगा। इसमें ऊर्जा उपकरणों से सुसज्जित किचन, ऑर्डर सुविधा एवं पिकअप काउंटर, स्मार्ट स्टोरेज, स्वच्छता का विशेष ख्याल रखा जाएगा। ट्रक के बाहरी हिस्से पर बड़े एलईडी डिस्प्ले लगाया जाना प्रस्तावित है, जिन पर उत्तर प्रदेश पर्यटन के प्रचार, डिजिटल मेन्यू और जन जागरूकता संबंधी संदेश प्रसारित किए जाएंगे।
पत्तल-बांस-मिट्टी के बर्तनों में खाने की पैकेजिंग
पर्यावरण संरक्षण इस परियोजना की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। फूड ट्रक के निर्माण में टिकाऊ, अग्निरोधक और पर्यावरण अनुकूल सामग्री का उपयोग किया जाएगा। सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। खाद्य सामग्री की पैकेजिंग के लिए पत्तल, बांस, मिट्टी या अन्य बायोडिग्रेडेबल सामग्री का उपयोग किया जाएगा। वहीं, जल संरक्षण के लिए जीरो लिक्विड डिस्चार्ज नीति लागू होगी। फूड ट्रक के चारों ओर 25 मीटर क्षेत्र को प्रतिदिन साफ रखा जाएगा। ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए तेज संगीत पर भी रोक रहेगी।