केंद्रीय वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमन ने कहा कि केंद्र सरकार ने यूपी के औद्योगिक विकास के लिए काफी काम किए हैं लेकिन बिगड़ी कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार के कारण कोई भी निवेशक नोएडा से आगे यूपी में आकर निवेश नहीं करना चाहता।
उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश सरकार ने केंद्र सरकार द्वारा यूपी के औद्योगिक विकास के लिए शुरू की गई योजनाओं को लागू करने में सहयोग नहीं किया।
मंगलवार को प्रदेश भाजपा मुख्यालय में पत्रकारों से मुखातिब निर्मला सीतारमन ने कहा, उप्र के गांवों में घर-घर बिजली पहुंचाने के लिए केंद्र के तय कार्यक्रम के अनुसार राज्य सरकार ने काम नहीं किया। लिहाजा गांवों की जनता आज भी बिजली से महरूम है।
केंद्र सरकार की योजनाओं को लागू करने में रुकावटें पैदा करना सुशासन का दावा करने वाली सरकार को शोभा नहीं देता।
दिया केंद्र के काम का हिसाब-किताब
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उन्होंने कहा, 2014-15 में एक्सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए यूपी को 50 करोड़ रुपये दिए गए। सेज नोएडा से 14,665 करोड़ का निवेश आया है। इससे दो साल में 1 लाख 13 हजार नौकरियां मिलेंगी। सेज यूपी से दस हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के निर्यात हुए हैं।
चुनाव के समय प्रत्याशी के भाई की हत्या हो गई। हम सोच सकते हैं कि प्रदेश में माहौल कितना खराब है।
उन्होंने कहा, निर्माणाधीन दिल्ली- मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का 210 किलोमीटर लंबा हिस्सा यूपी में पड़ेगा। इसके तहत नोएडा में इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप बनेगा। इसमें 426 करोड़ रुपये की लागत से काम चल रहे हैं। इससे 1 लाख 26 हजार लोगों को नौकरियां मिलेंगी।
दादरी में मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक हब बनाया जाएगा। लेकिन इन सभी बड़े कार्यों के लिए भूमि देने में यूपी सरकार पीछे है। उन्नाव में लेदर क्लस्टर स्वीकृत किया गया है, लेकिन राज्य सरकार इसे आगे नहीं बढ़ा पाई है।
भाजपा की सरकार बनी तो डेयरी विकास के लिए डेढ़ सौ करोड़ रुपये दिए जाएंगे। प्रत्येक पंचायत में डेयरी विकास के लिए काम होगा। एक हजार करोड़ से स्टार्टअप योजना लागू की जाएगी।
...तो गठबंधन क्यों किया
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सीतारमन ने कहा, यदि अखिलेश यादव ने पांच वर्ष तक अच्छी सरकार चलाई है तो उन्हें कांग्रेस के साथ गठबंधन की आवश्यकता क्यों हुई? ये कैसा गठबंधन है जिसमें कुछ क्षेत्रों में दोनों पार्टियां आमने- सामने लड़ रही हैं।
सोनिया-राहुल के क्षेत्र भी विकसित नहीं हुए
केंद्रीय मंत्री ने कहा, यूपी से करीब 30 साल में अमेठी, रायबरेली और सुल्तानपुर से गांधी परिवार की तीसरी पीढ़ी संसद तक पहुंची है। उस समय उप्र से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस की सरकार थी।
यूपीए सरकार में सोनिया और राहुल दोनों यहीं से सांसद थे लेकिन उस सरकार के दस वर्षों में यूपी तो दूर उनके निर्वाचन क्षेत्र तक विकसित नहीं हुए।