डॉक्टरों की कमी और आयोग से भर्ती में लगने वाले लंबे वक्त को देखते हुए प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश विशेषज्ञ चिकित्सक एवं चिकित्सा शिक्षक भर्ती बोर्ड का गठन किया है। यह बोर्ड लेवल 2 यानी एमडी-एमएस डिग्रीधारी विशेषज्ञ चिकित्सकों की भर्ती करेगा। साथ ही लेवल वन यानी एमबीबीएस डिग्रीधारी चिकित्सकों की पदोन्नति की प्रक्रिया भी पूरी करेगा।
डॉक्टरों की कमी के मुख्य कारण
हर साल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में करीब 200-250 विशेषज्ञ चिकित्सक भेजे जाते हैं। इसमें करीब 25 फीसदी कार्यभार ग्रहण करने के कुछ दिन बाद ही गायब हो जाते हैं। लंबे समय तक गायब होने के बाद इन्हें नोटिस दी जाती है, लेकिन जब नहीं लौटते हैं तो बर्खास्तगी की कार्रवाई करके उस पद को रिक्त घोषित किया जाता है। ग्रामीण इलाके से नौकरी छोड़ने वाले विशेषज्ञों ने बताया कि उन्हें आवास, बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा जैसी आधारभूत सुविधा नहीं मिलती है। तमाम अस्पतालों में उपचार में प्रयोग होने वाले संसाधन भी नहीं दिए जाते हैं। ऐसे में सरकारी सेवा छोड़ना विवशता होती है। निजी अस्पतालों में शहरी सुविधा के साथ ही आकर्षक वेतन भी मिलता है।
प्रदेश में कई स्तर पर डॉक्टरों की भर्ती चल रही है। नया बोर्ड भी बन रहा है। नए मेडिकल कॉलेजों से निकलने वाले विशेषज्ञ डॉक्टर भी कार्यभार ग्रहण कर रहे हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि साल दो साल में सभी पद भर जाएंगे। हमारी कोशिश है कि मरीजों को बेहतर इलाज मिले।-अमित कुमार घोष, अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग।