शहर जाने में खर्च होने वाला समय अब पढ़ाई में
गांव में संसाधन उपलब्ध होने से बच्चों और युवाओं के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी आसान हुई है। यहां विद्यार्थी नियमित अध्ययन के साथ ई-लर्निंग से भी जुड़ रहे हैं। पहले पढ़ाई के लिए शहर जाने में जो समय और पैसा खर्च होता था, अब उसका इस्तेमाल पढ़ाई में किया जा रहा है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2017 से पहले ई-लाइब्रेरी की पहुंच राज्य और जिला स्तर के करीब 76 स्थानों तक सीमित थी। अब डिजिटल लाइब्रेरी 57,600 ग्राम पंचायतों तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए करीब 60 लाख युवाओं को स्मार्टफोन और टैबलेट उपलब्ध कराए जाने की बात भी कही गई है।
32 हजार से अधिक स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम
प्रदेश में डिजिटल शिक्षा के विस्तार के तहत 32 हजार से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम और 15 हजार से अधिक विद्यालयों में आईसीटी लैब के माध्यम से पढ़ाई को तकनीक से जोड़ा गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को भी आधुनिक शैक्षिक संसाधनों तक पहुंच मिल रही है।
सरकार के अनुसार, वर्ष 2012-16 के दौरान पर्याप्त सरकारी निधि उपलब्ध होने के बावजूद 6.22 लाख बच्चों को पाठ्यपुस्तकें और 97 लाख बच्चों को यूनिफॉर्म नहीं मिल सकी थी। मौजूदा डिजिटल लाइब्रेरी पहल को गांवों में शिक्षा के संसाधन बढ़ाने की दिशा में बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
खसहा मोहम्मदपुर की डिजिटल लाइब्रेरी इसी बदलाव की तस्वीर पेश करती है। ग्राम पंचायत सचिवालय अब प्रशासनिक सेवाओं के साथ-साथ ज्ञान, अध्ययन और तकनीक के केंद्र के रूप में भी विकसित हो रहे हैं। अभिभावकों को भी उम्मीद है कि बच्चों को आधुनिक शैक्षिक संसाधनों के लिए अब गांव से दूर नहीं जाना पड़ेगा।