लोकेशन छुपाने के लिए प्रयोग होता है अवैध सिम बॉक्स
एडीसीपी के अनुसार, 32-पोर्ट सिम बॉक्स में कई सिम कार्ड लगाए जा सकते हैं। इनके जरिये इंटरनेट आधारित कॉल को अलग-अलग मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से संचालित किया जा सकता है। इस तकनीक का दुरुपयोग कर बड़ी संख्या में कॉल की जा सकती हैं और कॉल के वास्तविक स्रोत को छिपाया जा सकता है।
ऐसे में साइबर अपराधी किसी दूसरे देश में बैठकर कॉल करते हैं, जबकि अवैध सिम बॉक्स के जरिये कॉल भारतीय मोबाइल नंबर से आती हुई दिखाई देती है। डिजिटल अरेस्ट के मामलों में साइबर अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को फोन करते हैं। फिर गिरफ्तारी और जांच का डर दिखाकर उन पर लगातार दबाव बनाते हैं और रकम ऐंठ लेते हैं।
बरामद उपकरणों की होगी तकनीकी जांच
एडीसीपी ने बताया कि बरामद सभी डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जांच के लिए भेजा गया है। इनके इस्तेमाल, सिम कार्ड, कॉलिंग पैटर्न और नेटवर्क से जुड़े लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। इस संबंध में साइबर क्राइम थाने में एफआईआर भी दर्ज की गई है। पुलिस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
सौगात अस्थान चला रहा था पूरा नेटवर्क
एसीपी साइबर क्राइम शाहिदा परवीन ने बताया कि छानबीन में पता चला है कि जिन चार स्थानों से अवैध सिम बॉक्स बरामद किए गए, वे सभी सौगात अस्थान नाम के जालसाज ने किराए पर ले रखे थे। आरोपी ने जगहें किराए पर लेने के बाद वहां पूरा सिस्टम लगाया था। वह सीसीटीवी कैमरों की मदद से निगरानी भी करता था।
सौगात का नाम हाल ही में वाराणसी में पकड़े गए जालसाजों से पूछताछ के दौरान सामने आया था। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। पुलिस को उसके दो अलग-अलग पते वाले आधार कार्ड मिले हैं। एक आधार कार्ड पर कानपुर और दूसरे पर सुशांत गोल्फ सिटी का पता दर्ज है। एसीपी ने बताया कि हाल के दिनों में लखनऊ में हुई डिजिटल अरेस्ट की घटनाओं में भी बरामद सिम बॉक्स का इस्तेमाल किया गया है।