सीएम के साथ यूपी डीजीपी प्रशांत कुमार।
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पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर डीजीपी प्रशांत कुमार ने कहा कि बीते साढ़े सात वर्ष में प्रदेश को माफिया और अपराधियों से मुक्ति दिलाने में पुलिस को सफलता मिली है। इससे प्रदेश में निवेश का सुरक्षित माहौल बना है। उन्होंने पुलिसकर्मियों के कल्याणार्थ की गईं घोषणाओं के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार किया। कहा कि इससे पुलिस बल के मनोबल में वृद्धि होगी।
डीजीपी ने कहा कि 68 मुकदमों में प्रभावी पैरवी करके 31 माफिया व उसके 66 सहयोगियों को आजीवन कारावास की सजा दिलाई गई है। इनमें से दो को फांसी की सजा हुई है। माफिया और गैंग के सदस्यों की 4,057 करोड़ रुपये कीमत की अवैध संपत्ति को जब्त किया गया है। प्रदेश में धार्मिक स्थलों से 1,08,037 से अधिक लाउडस्पीकर उतारे गए या उनकी ध्वनि नियंत्रित कराई गई। ऑपरेशन त्रिनेत्र के तहत 11.71 लाख से अधिक सीसीटीवी स्थापित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि जिलों में 15,130 महिला पुलिसकर्मी तैनात की गई हैं, जिनमें से 10,378 को महिला बीट अफसर बनाया गया है।
सीएम की घोषणाओं के बारे में उन्होंने बताया कि कर्त्तव्यपालन के दौरान पुलिसकर्मियों की मृत्यु होने के बाद पत्नी और माता-पिता के भी जीवित नहीं रहने की दशा में शासनादेश में दी गई व्यवस्था के अनुसार परिवार को पूर्ण धनराशि नहीं मिलने की समस्या का सामना करना पड़ रहा था। इस पर विचार के बाद शासनादेश को संशोधित करने का निर्णय लिया गया है। इससे पूरी अनुग्रह धनराशि कानूनी वारिस को उपलब्ध कराई जा सकेगी।
11 साल बाद बढ़ा बैरक भत्ता
उन्होंने बताया कि कार्य की आकस्मिकता के कारण करीब एक लाख मुख्य आरक्षी व आरक्षी बैरक में रहते हैं। वर्ष 2013 में पुलिस एकोमोडेशन अलाउंस (बैरक भत्ता) की व्यवस्था की गई थी। इसमें बढ़ोतरी होने से पुलिस बल के 25 प्रतिशत से ज्यादा अल्प वेतनभोगी कर्मचारी लाभान्वित होंगे। बता दें कि पहले 456 रुपये भत्ता मिलता था, जिसे बढ़ाकर 750 रुपये कर दिया गया है। पुलिस में भर्ती हुए एक हजार से अधिक कुशल खिलाड़ियों की सुविधाओं के लिए 70 लाख रुपये का बजट पर्याप्त नहीं होने की वजह से अगले वित्तीय वर्ष में इसे बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये किया जाएगा। इसे खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, ट्रेनर, फीजियो, आहार और उपकरण आदि की व्यवस्था की जाएगी।