वर्ष 2016 की तुलना में वर्ष 2025 में डकैती की घटनाओं में लगभग 90 प्रतिशत, लूट में 84 प्रतिशत, फिरौती के लिए अपहरण में 69 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में बीते साढ़े आठ साल में कोई दंगा नहीं हुआ। वहीं एनसीआरबी के वर्ष 2023 के आंकड़ों के अनुसार अपराध के मामले में उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर 20वें स्थान पर है और कई गंभीर अपराधों में प्रदेश की अपराध दर राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। अपराधियों को शीघ्र सजा दिलाने के उद्देश्य से शुरू किए गए ऑपरेशन अभियोजन के भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। मिशन शक्ति केंद्रों की स्थापना के बाद बलात्कार, दहेज हत्या, घरेलू हिंसा और महिलाओं व बच्चों के अपहरण जैसे अपराधों में तीन महीनों के भीतर 34 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है।
वर्ष 2025 में साइबर अपराध के मामलों में 325 करोड़ रुपये से अधिक की राशि फ्रीज कराई गई, और 77621 मोबाइल नंबर तथा 17692 आईएमईआई नंबर ब्लॉक किए गए। एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने 12800 करोड़ रुपये से अधिक कीमत के मादक पदार्थ जब्त किए और 21 अंतरराज्यीय मादक पदार्थ गिरोहों का भंडाफोड़ किया। कोडीनयुक्त कफ सिरप के अवैध कारोबार पर भी सख्त कार्रवाई की गई। आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने हिजबुल मुजाहिदीन, अल कायदा इंडिया सब कॉन्टिनेंट, जैश-ए-मोहम्मद और खालिस्तानी आतंकियों के साथ-साथ आईएसआई एजेंटों और नक्सलियों के खिलाफ भी कार्रवाई कर प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है।
बीते साढ़े आठ वर्ष के दौरान पुलिस और अपराधियों के बीच 16284 मुठभेड़ हुईं, जिसमें 266 अपराधी ढेर किए गए। वर्ष 2025 में सर्वाधिक 48 अपराधी पुलिस की जवाबी फायरिंग में मारे गए। वहीं वर्ष 2025 अवैध धर्मांतरण के खिलाफ कार्रवाई के लिए भी जाना जाएगा। इस दौरान 475 एफआईआर दर्ज करने के साथ 855 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। सर्वाधिक चर्चा में बलरामपुर में छांगुर और आगरा में अंतरराज्यीय अवैध धर्मांतरण सिंडीकेट का मामला रहा।