सवाल- आपकी पहचान एक मजबूत डीजीपी के रूप में रही, कोई कसक जो रह गई हो?
जवाब- यह नहीं कहूंगा कि मैं सबसे मजबूत डीजीपी रहा। कई ऐसे अफसर रहे, जिन्होंने अच्छे डीजीपी के रूप में काम किया। दिक्कत क्या हुई कि पिछले कई सालों में जो भी डीजीपी हुआ, उसका कार्यकाल कम रहा। 1977 से केवल दो डीजीपी ऐसे रहे, जिन्होंने दो साल का कार्यकाल पूरा किया।
सवाल- अपने कार्यकाल का सबसे कठिन समय कौन सा मानते हैं?
जवाब- सीएए के विरोध में प्रदेश के कई जिले प्रभावित थे। यह स्थिति मौजूदा सरकार के कार्यकाल में पहली बार आई थी। इससे भी प्रोफेशनल तरीके से निपटा गया। वैज्ञानिक तरीके से हिंसा करने वाले लोगों की पहचान कर कार्रवाई की गई। वहीं, यह सुनिश्चित किया गया कि कोई निर्दोष न फंसे। इसके लिए एसआईटी का गठन किया गया। कुंभ और चुनाव भी चुनौतीपूर्ण था।
सवाल- विवेक तिवारी हत्याकांड के समय पुलिस विरोध में उतर आई थी, यह कितना चुनौतीपूर्ण था?
जवाब- विवेक तिवारी की हत्या हमारी फोर्स में एक सदस्य ने ही की थी। हमने तत्काल इस बात की घोषणा की थी कि जिसने भी गोली चलाई वह अपराधी के रूप में देखा जाएगा। हमने कानून के दायरे में रह कर कार्रवाई की और उसे जेल भेजा। निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया। वहीं, जिन्होंने विरोध किया उनकी बात भी सुनी और उनकी समस्याओं का समाधान किया गया।
सवाल- एक अफसर ने ही भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, मुखिया के नाते आप कैसे देखते हैं?
जवाब- पिछले ढाई सालों में जो भी तबादले हुए, वह सिर्फ मेरिट के आधार पर हुए हैं। अगर कोई कहता है कि किसी पोस्टिंग में पैसे लिए गए तो उसे साबित करके बताए। इस मामले में हमने वैधानिक कार्रवाई की है। जिस अधिकारी ने सेवा नियमावली का उल्लंघन किया, उसका स्पष्टीकरण लेकर कार्रवाई की। जिन लोगों पर आरोप लगाए गए, उन्हें संवेदनशील पदों से हटाकर उनके खिलाफ भी उच्चस्तरीय जांच गठित की गई है।
सवाल- चर्चा है कि आप सेवा विस्तार लेने जा रहे हैं? कितनी सच्चाई है?
जवाब- कोई सच्चाई नहीं। मैं 31 जनवरी को अवकाश ग्रहण करना चाहता हूं। हमारे बाद ऐसा ऑफिसर आए, जो सही नेतृत्व दे सके। रिटायरमेंट के बाद बहुत सारे काम पूरे करने हैं। जैसे लिखने का काम, पढ़ने का काम। म्यूजिक का हमारा शौक है, उसके प्लान हो सकते हैं।