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अमर उजाला से बातचीत में बोले यूपी डीजीपी, पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू कराना ऐतिहासिक क्षण

Tue, 14 Jan 2020 01:05 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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यूपी डीजीपी ओ पी सिंह। - फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश के डीजीपी ओम प्रकाश सिंह ने पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू कराने को अपनी नौकरी का सबसे ऐतिहासिक पल बताया है। वह इसी महीने की 31 तारीख को रिटायर हो रहे हैं। वर्ष 1977 के बाद प्रदेश के तीसरे डीजीपी हैं, जो अपना दो वर्ष का कार्यकाल पूरा करने जा रहे हैं। उन्होंने अमर उजाला के संवाददाता सैयद यासिर रजा से अपने कार्यकाल को लेकर खुलकर बात की।

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सवाल- पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू हुई है। इस दिन को किस तरह देखते हैं?
जवाब-
यह मेरे लिए ऐतिहासिक क्षण है। इस दिन का इंतजार यूपी के सभी पुलिस अधिकारियों को कई सालों से था। जब हम नौकरी में आए थे, तब मुंबई, दिल्ली व मद्रास में आयुक्त प्रणाली को देखकर लगता था कि काश! यह व्यवस्था हमारे यहां भी होती। मेरे कार्यकाल में यह व्यवस्था लागू हुई। पुलिस के लिए यह दिन बहुत बड़ा दिन है।

सवाल- पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू कराना आपके लिए कितना कठिन था?
जवाब-
किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। पिछले दो सालों में यह साबित किया कि हमारी नियत साफ है। राज्य सरकार को अपनी गतिविधियों के बारे में पल-पल की जानकारी दी। पुलिस की विश्वसनीयता राज्य सरकार की नजर में हो गई, तब मुख्यमंत्री को इस व्यवस्था के बारे में बताया। उन्होंने हर पहलू को समझने के बाद इसे लागू किया।
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सवाल- इस प्रणाली में शस्त्र लाइसेंस, बार लाइसेंस के अधिकार पुलिस को नहीं दिए गए।
जवाब-
हमारा फोकस कानून व्यवस्था पर है। ऐसा नहीं है कि हम एकांत में रहकर काम करेंगे। हमारा समन्वय जिलों के अधिकारियों से बना रहेगा। जिस क्षेत्र की बात आपने की उस क्षेत्र में भी हम समन्वय बनाए रखेंगे। आने वाले दिनों में जरूरत महसूस हुई तो उसे भी शामिल किया जा सकता है।

'यह नहीं कहूंगा कि मैं सबसे मजबूत डीजीपी रहा'

सवाल- आपकी पहचान एक मजबूत डीजीपी के रूप में रही, कोई कसक जो रह गई हो?
जवाब-
यह नहीं कहूंगा कि मैं सबसे मजबूत डीजीपी रहा। कई ऐसे अफसर रहे, जिन्होंने अच्छे डीजीपी के रूप में काम किया। दिक्कत क्या हुई कि पिछले कई सालों में जो भी डीजीपी हुआ, उसका कार्यकाल कम रहा। 1977 से केवल दो डीजीपी ऐसे रहे, जिन्होंने दो साल का कार्यकाल पूरा किया।

सवाल- अपने कार्यकाल का सबसे कठिन समय कौन सा मानते हैं?
जवाब-
सीएए के विरोध में प्रदेश के कई जिले प्रभावित थे। यह स्थिति मौजूदा सरकार के कार्यकाल में पहली बार आई थी। इससे भी प्रोफेशनल तरीके से निपटा गया। वैज्ञानिक तरीके से हिंसा करने वाले लोगों की पहचान कर कार्रवाई की गई। वहीं, यह सुनिश्चित किया गया कि कोई निर्दोष न फंसे। इसके लिए एसआईटी का गठन किया गया। कुंभ और चुनाव भी चुनौतीपूर्ण था।

सवाल- विवेक तिवारी हत्याकांड के समय पुलिस विरोध में उतर आई थी, यह कितना चुनौतीपूर्ण था?
जवाब-
विवेक तिवारी की हत्या हमारी फोर्स में एक सदस्य ने ही की थी। हमने तत्काल इस बात की घोषणा की थी कि जिसने भी गोली चलाई वह अपराधी के रूप में देखा जाएगा। हमने कानून के दायरे में रह कर कार्रवाई की और उसे जेल भेजा। निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया। वहीं, जिन्होंने विरोध किया उनकी बात भी सुनी और उनकी समस्याओं का समाधान किया गया।
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सवाल- एक अफसर ने ही भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, मुखिया के नाते आप कैसे देखते हैं?
जवाब-
पिछले ढाई सालों में जो भी तबादले हुए, वह सिर्फ मेरिट के आधार पर हुए हैं। अगर कोई कहता है कि किसी पोस्टिंग में पैसे लिए गए तो उसे साबित करके बताए। इस मामले में हमने वैधानिक कार्रवाई की है। जिस अधिकारी ने सेवा नियमावली का उल्लंघन किया, उसका स्पष्टीकरण लेकर कार्रवाई की। जिन लोगों पर आरोप लगाए गए, उन्हें संवेदनशील पदों से हटाकर उनके खिलाफ भी उच्चस्तरीय जांच गठित की गई है।

सवाल- चर्चा है कि आप सेवा विस्तार लेने जा रहे हैं? कितनी सच्चाई है?
जवाब-
कोई सच्चाई नहीं। मैं 31 जनवरी को अवकाश ग्रहण करना चाहता हूं। हमारे बाद ऐसा ऑफिसर आए, जो सही नेतृत्व दे सके। रिटायरमेंट के बाद बहुत सारे काम पूरे करने हैं। जैसे लिखने का काम, पढ़ने का काम। म्यूजिक का हमारा शौक है, उसके प्लान हो सकते हैं।
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