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मेधावियों को सफलता के टिप्स देकर यूपी डीजीपी बोले- सोशल मीडिया में बड़े धोखे, संभलकर रहें

Wed, 04 Oct 2017 08:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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बच्चों को सम्बोधित करते डीजीपी सुलखान सिंह - फोटो : amar ujala
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डीजीपी सुलखान सिंह ने मेधावियों को सोशल मीडिया से संभलकर रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया आभासी दुनिया में जी रही है, जहां बिना किसी पहचान के लोग आपस में संवाद कर रहे हैं। ऐसी दुनिया से सावधान रहें। आज हर बच्चा साइबर दुनिया से जुड़ा है। वे फेसबुक जैसे सोशल मीडिया में व्यस्त हैं, लेकिन यहां धोखे ज्यादा हैं, इसलिए संभलकर रहें। वे मंगलवार को ‘अमर उजाला के मेधावी छात्र सम्मान उत्सव’ की पूर्व संध्या पर इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में मेधावियों से बातचीत कर रहे थे।
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सर्वश्रेष्ठ की कोशिश में अच्छे मौके न गवाएं
डीजीपी ने कहा कि सर्वश्रेष्ठ के चक्कर में अच्छे मौके न गवाएं। उन्होंने कहा- बेस्ट इज द एनिमी ऑफ गुड... ऐसा न हो कि सर्वश्रेष्ठ को पाने की सोचकर बैठे रहें और अच्छे मौके भी हाथ से फिसल जाएं। इसलिए जो मिल रहा है उसे हासिल कर आगे बढ़ते रहें। सभी बच्चे अपने लक्ष्य निर्धारित करते हैं। कुछ सफल होते हैं तो कुछ लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाते। इससे निराश होने की जरूरत नहीं। हो सकता है कि उन्हें सर्वश्रेष्ठ न मिला हो, लेकिन इस कोशिश में अच्छे मौके भी न गवाएं।

डीजीपी बोले, ‘ऐसे लक्ष्य न बनाएं कि इंजीनियरिंग करनी है तो सिर्फ आईआईटी से ही। अगर कोई अच्छा विकल्प है, तो उसे ही हासिल कर लें। आईआईटी के लिए भी तैयारी करते रहें लेकिन हाथ में आए मौके न गवाएं।’
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असफलता का अफसोस न करें, उनसे उबरकर आगे बढ़ें

- फोटो : amar ujala
डीजीपी ने कहा कि आप अपनी मेहनत से अपने प्रदर्शन की गारंटी ले सकते हैं, दूसरे की नहीं। हमें अपनी असफलताओं का अफसोस नहीं करना चाहिए, बल्कि उनसे उबर कर आगे बढ़ना चाहिए।

‘मैं पढ़ाई में कभी ऑनर्स नहीं ला सका। हाईस्कूल में दो नंबर से रह गए तो दूसरी परीक्षाओं में भी 75 प्रतिशत का आंकड़ा नहीं छू सका। दो-चार दिन अफसोस रहा, लेकिन कब तक दुख मनाते। आगे बढ़ते रहे और कामयाबी मिलती रही।’

उन्होंने कहा, ‘ऐसे कार्यक्रमों से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है। अलग-अलग माहौल, स्थान और संस्कृतियों से आए मेधावियों से संवाद कर काफी कुछ नया सीखने को मिलेगा।’

जो काम करें उसमें ही सर्वश्रेष्ठ करें...
डीजीपी बोले, जरूरी नहीं कि आप बेहतर काम ही करें। आकलन इससे नहीं होगा कि कौन सा काम कैसे किया। आकलन इससे होगा कि काम को कितनी अच्छे तरीके से किया। इसलिए जो काम मिले, उसे ही बेहतर तरीके से करें। काम में उत्कृष्टता से मंजिल आसान हो जाती है।  ‘सभी अपने लक्ष्य तय करते हैं, लेकिन जो काम सामने आ जाए, उसे पूरी लगन व मेहनत से करें। उसमें कहीं से भी ढिलाई न हो। इससे रास्ते खुलते हैं।’
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संघर्ष से चूकें नहीं...

डीजीपी सुलखान सिंह - फोटो : amar ujala
डीजीपी सुलखान ने कहा कि संघर्ष से कभी न चूकें। कई अधिकारी देखे, जिन्होंने सर्वश्रेष्ठ पढ़ाई की। अच्छी नौकरी में चुने गए, लेकिन नौकरी में बेहतर नहीं कर पाए। उनका संघर्ष नौकरी तक आते-आते खत्म हो गया। जहां संघर्ष खत्म हो गया, वहीं वे अधिकारी चूक गए और असफल हो गए। उन्होंने यह भी कहा कि साथ देने वाले को कभी न भूलें और अपनी मेहनत पर भरोसा करें।
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