चार माह तक शिव संभालते हैं सृष्टि का कार्य
ज्योतिषाचार्य एसएस. नागपाल के अनुसार, धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु के योगनिद्रा में रहने के दौरान सृष्टि का संचालन भगवान शिव करते हैं। इसी अवधि में सावन का पवित्र महीना भी आता है। एक अन्य मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु इस समय राजा बलि के द्वार पर निवास करते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी पर पुनः जागृत होते हैं।
शुभ योग में होगा व्रत और पूजन
इस वर्ष देवशयनी एकादशी पर ब्रह्म योग के बाद इंद्र योग, पुष्य नक्षत्र तथा सूर्य और उच्च के गुरु का शुभ संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इन योगों में किए गए पूजा-पाठ, जप और दान का विशेष फल मिलता है।
पूजन और दान का विशेष महत्व
भगवान विष्णु का पंचामृत, केसर मिश्रित दूध या गंगाजल से अभिषेक कर उन्हें पीले वस्त्र, पीले पुष्प और फल अर्पित करना शुभ माना गया है। शाम को तुलसी के पौधे के सामने घी का दीपक जलाकर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप और 11 परिक्रमा करने की भी मान्यता है। इसके अलावा विष्णु सहस्रनाम का पाठ व चना दाल, हल्दी, केला, पीतल और पीले वस्त्र का दान करने से सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और आर्थिक बाधाओं से मुक्ति मिलने की मान्यता है।