प्रदेश सरकार ब्लॉकों में तकनीकी सहायक की तैनाती ग्राम पंचायतों का कलस्टर बनाकर करेगी। ग्राम्य विकास विभाग के इस प्रस्ताव पर राज्य रोजगार गारंटी परिषद के अध्यक्ष व कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक सिन्हा ने सहमति दे दी है। मनरेगा से जुड़े कार्य तकनीकी कसौटी पर ठीक से हों, इसके लिए ब्लॉकों में तकनीकी सहायकों की तैनाती की जाती है। प्रत्येक तकनीकी सहायक द्वारा प्रति सप्ताह न्यूनतम तीन मॉडल एस्टीमेट बनाया जाना चाहिए।
बताया जा रहा है कि तकनीकी सहायकों के लिए ग्राम पंचायतों के निर्धारण का कोई स्पष्ट मानक न होने से यह व्यवस्था ठीक से क्रियान्वित नहीं हो पा रही है। ग्राम्य विकास विभाग ने राज्य रोजगार गारंटी परिषद के समक्ष ग्राम पंचायतों का कलस्टर बनाकर तकनीकी सहायकों की तैनाती का प्रस्ताव रखा था। कलस्टर की पंचायतें आपस में जुड़ी होंगी जिससे तकनीकी सहायकों व पंचायतों को कामकाज में आसानी होगी। परिषद से जिलाधिकारियों को पंचायतों के कलस्टर आधार पर तकनीकी सहायकों की तैनाती का निर्देश देने का आग्रह किया था। परिषद के अध्यक्ष ने इस प्रस्ताव पर सहमति दे दी है।
मुख्य अभियंता की अध्यक्षता में बनेगा राज्य तकनीकी प्रकोष्ठ
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 1000 करोड़ से अधिक खर्च करने वाले राज्यों में मुख्य अभियंता की अध्यक्षता में राज्य तकनीकी प्रकोष्ठ के गठन की व्यवस्था की है। प्रकोष्ठ के गठन का प्रस्ताव भी परिषद के समक्ष रखा गया था। परिषद के अध्यक्ष ने इस पर भी सहमति दे दी है। इस प्रकोष्ठ में एक मुख्य अभियंता, एक अधीक्षण अभियंता, एक अधिशासी अभियंता व तीन सहायक अभियंता शामिल किए जाएंगे।
टीएसी में रिक्त प्राविधिक परीक्षकों के पद भरने को हरी झंडी
प्रदेश के आठ मंडलों में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांचने के लिए गठित मंडलीय प्राविधिक समितियों (टीएसी) में मंडलीय प्राविधिक परीक्षक के पद खाली हैं। इससे मनरेगा से सृजित परियोजनाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में मुश्किल आ रही है। परिषद के अध्यक्ष ने सभी आठ मंडलों में सिंचाई विभाग से प्रतिनियुक्ति पर मंडलीय प्राविधिक परीक्षक की रिक्ति भरने पर सहमति दे दी है।