स्थानीय लोगों ने बताया कि सुबह शिवाजी घर के सामने स्थित मंदिर में जल चढ़ाकर लौट रहे थे। इसी दौरान ऋषभ उन्हें चिढ़ाते हुए मोबाइल से वीडियो बनाने लगा। उसने टिप्पणी करते हुए कहा कि बनवा लिया चबूतरा... यह सुनकर शिवाजी नाराज हो गए और उन्होंने भाई शंभू को आवाज लगाई और मोबाइल फोन लेकर आने के लिए कहा। शिवाजी भी ऋषभ का वीडियो बनाना चाह रहे थे। शंभू के पहुंचने पर दोनों पक्षों में बहस शुरू हो गई। इस बीच ऋषभ के पिता, चाचा और बहनें भी पहुंच गईं। शोर सुनकर कमरे में सो रहे सुयश बाहर आ गए। फिर दोनों पक्षों में मारपीट शुरू हो गई। इसी दौरान ऋषभ घर से असलहा ले आया और शिवाजी, शंभू और सुयश को गोली मार दी। गोली लगने के बाद भी सुयश ने भागकर खुद को बचाने की कोशिश की। वह कार के पीछे जाकर छिप गए, लेकिन ऋषभ ने पीछा किया और उन्हें दोबारा गोली मार दी। उधर, शिवाजी और शंभू ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
वारदात के बाद इलाके में अफरातफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने बीचबचाव का प्रयास किया, लेकिन ऋषभ ताबड़तोड़ फायरिंग कर रहा था। गोलीबारी में स्थानीय निवासी जितेंद्र कश्यप बाल-बाल बचे। उन्होंने बताया कि ऋषभ ने उन पर भी दो गोली चलाई थी। कार के पीछे छिपकर उन्होंने खुद को बचाया। घटना की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे सआदतगंज थाने के सिपाही कार्तिक ने ऋषभ को दबोचा।