आयोग की सख्त टिप्पणी
आयोग ने अपने नए आदेश में स्पष्ट किया है कि एफपीपीसीए के आंकड़े यूपीपीसीएल के पास होने चाहिए। यूपीईआरसी विनियमों के तहत यह जानकारी वेबसाइट पर भी सार्वजनिक होनी चाहिए थी। कॉर्पोरेशन ने आयोग द्वारा मांगी गई मूल सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराईं। वह अन्य राज्यों में लागू व्यवस्था का अध्ययन करने की बात कर रहा है। जबकि आयोग ने केवल उत्तर प्रदेश में 10 प्रतिशत एफपीपीसीए के आंकड़ों का आधार पूछा था।
बिना आंकड़े वसूली अवैध
अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि कॉर्पोरेशन के पास एफपीपीसीए निर्धारण के आवश्यक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं से की जा रही वसूली अवैध है। यह स्वयं संदेह के घेरे में आ जाती है। यह स्थिति अत्यंत गंभीर है क्योंकि लाखों उपभोक्ताओं से अतिरिक्त शुल्क लिया जा रहा है। उन्होंने आयोग से तत्काल 10 प्रतिशत की वसूली पर रोक लगाने की मांग की।
पारदर्शिता और जवाबदेही
परिषद अध्यक्ष ने बताया कि आयोग ने यूपीपीसीएल को 19 जून तक सभी मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध कराने को कहा है। आयोग का यह आदेश इस बात का संकेत है कि नियामक संस्था मामले को गंभीरता से ले रही है। उपभोक्ताओं से अतिरिक्त धनराशि वसूलने से पहले सभी गणनाएं और नियामकीय प्रक्रियाएं स्पष्ट होनी अनिवार्य हैं। यदि नियमानुसार अभिलेख वेबसाइट पर प्रकाशित नहीं किए गए, तो यह नियामकीय प्रावधानों का उल्लंघन है। आयोग ने 1 जून को ही इस आदेश को गैर कानूनी बताया था।