नियोजन विभाग के अनुसार, इस प्रमाणपत्र के आधार पर कंपनी को तकनीकी मूल्यांकन में सफल घोषित किया गया। गोरखपुर परियोजना के लिए तीन सितंबर 2026 को अनुबंध हुआ, जबकि आगरा परियोजना के लिए 24 अगस्त 2026 को आशय पत्र जारी किया गया। नोटिस में इन दोनों परियोजनाओं की निविदाओं और अनुबंधों का उल्लेख करते हुए जवाब मांगा गया है।
14 दिन में जवाब देने का निर्देश
उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम की अयोध्या इकाई ने नौ अक्तूबर को जारी पत्र में अनुभव प्रमाणपत्रों के सत्यापन की स्थिति स्पष्ट की। इकाई के चार अक्तूबर 2026 के पत्र में भी जांच का उल्लेख है। निगम के अनुसार, सिद्धार्थ विवि के निर्माण कार्य के संबंध में 12 अप्रैल 2019 को जारी प्रमाणपत्र वैध था, लेकिन 21 अक्तूबर 2019 के प्रमाणपत्र को उसने जारी करने से इन्कार करते हुए अवैध बताया। यही प्रमाणपत्र विभागीय कार्रवाई का प्रमुख आधार है।
नोटिस में निविदा की शर्तों, अयोग्यता संबंधी प्रावधानों और इंटीग्रिटी पैक्ट का हवाला दिया गया है। इसमें फर्जी दस्तावेज लगाने, तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत करने और निविदा प्रक्रिया प्रभावित करने को गंभीर उल्लंघन माना गया है।
अधीक्षण अभियंता राजेश कुमार ने कंपनी को 14 दिन में जवाब देने का निर्देश दिया है। जवाब के आधार पर आशय पत्र व अनुबंध निरस्त करने, भविष्य की निविदाओं में भाग लेने से रोकने और ब्लैकलिस्ट करने पर निर्णय होगा। गंभीर अनियमितता मिलने पर संबंधित एजेंसियों को जांच के लिए सूचना भी दी जा सकती है।