पार्टी के रणनीतिकारों के मुताबिक जिलाध्यक्षों के चयन में अन्य दलों की स्थिति को निगाह में रखा जाएगा। भाजपा नए सिरे से जिलाध्यक्ष चयन कर रही है। सपा में भी जिलाध्यक्ष बदले जाने हैं। ऐसे में पार्टी की कोशिश होगी कि ये दोनों दल जिस बिरादरी का संबंधित जिले में अध्यक्ष रखते हैं, कांग्रेस में उससे इतर रखा जाए। पूर्वांचल में जौनपुर, आजमगढ़ सहित ज्यादातर जिलों में पिछड़े वर्ग के जिलाध्यक्ष बनाने की तैयारी है। जहां अल्पसंख्यकों की आबादी अधिक है, वहां यदि सपा ने अल्पसंख्यक वर्ग का जिलाध्यक्ष बनाया है तो कांग्रेस दूसरी सबसे बड़ी जाति का जिलाध्यक्ष बनाने की तैयारी में हैं। अल्पसंख्यक को शहर अध्यक्ष अथवा प्रदेश कार्यकारिणी में समायोजित किया जाएगा। जिलाध्यक्ष चुनते समय संबंधित व्यक्ति की सक्रियता सर्वोपरि रखी जाएगी।