कांग्रेस अनुशासन समिति ने पार्टी के 10 पुराने दिग्गजों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। वे मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और उनकी टीम के फैसलों पर लगातार सवाल उठा रहे थे।
14 नवंबर को बाल दिवस के अवसर पर उन्होंने बैठक बुलाकर भी विरोध दर्ज कराया था। इसके बाद 11 वरिष्ठ नेताओं को नोटिस जारी किया गया था। यूपी मीडिया प्रभारी राजीव त्यागी ने बताया कि पूर्व विधायक हाफिज मो. उमर 14 नवंबर की बैठक में शामिल नहीं थे। इसलिए उनके जवाब से प्रदेश नेतृत्व संतुष्ट है। शेष को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है।
त्यागी ने बताया कि समाचार पत्रों के माध्यम से उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अनुशासन समिति की जानकारी में आया कि कुछ नेता उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी से सम्बन्धित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्णयों के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर बैठक करके विरोध कर रहे थे। उनका यह आचरण पार्टी की नीतियों और आदर्शों के विपरीत है, जो अनुशासनहीनता की परिधि में आता है।
अनुशासन समिति ने पूर्व सांसद संतोष सिंह, पूर्व एमएलसी सिराज मेंहदी, पूर्व गृह मंत्री रामकृष्ण द्विवेदी, पूर्व मंत्री सत्यदेव त्रिपाठी, पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह सोलंकी और पूर्व विधायक भूधर नारायण मिश्रा को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। ये सभी नेता निष्कासन की कार्रवाई पूरी होने तक अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी केसदस्य भी थे।
इसके अलावा पूर्व विधायक नेकचंद्र पांडेय, पूर्व विधायक स्वयं प्रकाश गोस्वामी, युवा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्वयं प्रकाश गोस्वामी और गोरखपुर के पूर्व जिलाध्यक्ष संजीव सिंह के खिलाफ भी निष्कासन की कार्रवाई की गई है।
आरोप-प्रत्यारोप : निष्कासित कांग्रेसी मीडिया से रूबरू होंगे आज
निष्कासित किए गए पूर्व एमएलसी सिराज मेंहदी ने कहा कि कुछ नेता कांग्रेस के राजनीतिक चरित्र को खत्म करके इसे प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह चलाना चाहते हैं।
यह कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि तत्कालीन सीएम टीएन सिंह को विधानसभा चुनाव हराने वाले राम कृष्ण द्विवेदी तक को निष्कासित कर दिया गया है। जिन नेताओं को निष्कासित किया गया है, उन्हें अभी तक पीसीसी की ओर से भेजा गया नोटिस नहीं मिला है।
सिराज मेंहदी ने कहा कि इस तरह से कांग्रेस का नुकसान चुपचाप बैठकर नहीं देखा जा सकता। सभी निष्कासित नेता सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अपना पक्ष रखेंगे।