सीएम योगी आदित्यनाथ ने समय से भुगतान न करने वाली गन्ना मिलों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा है कि चीनी मिलों को गन्ना खरीद के लिए कमांड एरिया का निर्धारण उनके गन्ना मूल्य भुगतान के रिकॉर्ड के आधार पर किया जाए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जो मिलें भुगतान में देरी या हीलाहवाली करें, उनके खिलाफ सख्ती होगी।
मुख्यमंत्री सोमवार को चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग की समीक्षा बैठक कर रहे थे। विभागीय अधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण के जरिये गन्ना मूल्य भुगतान, उत्पादकता, आधारभूत संरचना, रोजगार और भावी योजनाओं की जानकारी दी गई। सीएम ने कहा कि बेहतर गन्ना पैदावार के लिए किसानों को उन्नत किस्म के बीज समय पर उपलब्ध कराए जाएं। इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके), चीनी मिलों और गन्ना समितियों को मिलकर कार्य करना होगा। खेतों का दौरा कर फसल को देखें। किसान गोष्ठियों में मंत्रियों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने गन्ना समितियों को और सशक्त करने की आवश्यकता भी जताई।
चीनी मिलों के कार्यदिवस बढ़ाकर 155 करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने चीनी मिलों के मौजूदा 142 कार्यदिवसों को बढ़ाकर 155 दिन करने की जरूरत बताई। कोऑपरेटिव व फेडरेशन की चीनी मिलों की गहन समीक्षा के निर्देश भी दिए। इन मिलों की उत्पादन क्षमता के साथ-साथ वहां कार्यरत कार्मिकों की योग्यता का भी आकलन किया जाएगा। बैठक में बताया गया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अब तक 285994 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है, जो 1995-2017 के 2,13,520 करोड़ रुपये की तुलना में 72474 करोड़ रुपये अधिक है। वर्ष 2024-25 में निर्धारित 34466.22 करोड़ में से 83.8 प्रतिशत यानी 28873.55 करोड़ का भुगतान 2 मई तक संपन्न हो चुका है। इसी तरह वर्ष 2016-17 में गन्ना क्षेत्रफल 20.54 लाख हेक्टेयर था, जो 2024-25 में बढ़कर 29.51 लाख हेक्टेयर हो गया है। इसी अवधि में उत्पादकता भी 72.38 टन प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 84.10 टन प्रति हेक्टेयर तक पहुंची है।
9.81 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार
राज्य में 45 जिलों में संचालित 122 चीनी मिलें, 236 खांडसारी इकाइयां, 8707 कोल्हू इकाइयां, 65 कोजेन इकाइयां और 44 डिस्टिलरी इकाइयां चल रही हैं। इन इकाइयों से प्रत्यक्ष रूप से 9.81 लाख लोगों को रोजगार प्राप्त हो रहा है। वर्ष 2023-24 में 102 डिस्टिलरियों से 150.39 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन हुआ है। निजी निवेश से 6771.87 करोड़ रुपये की लागत से अतिरिक्त 105.65 करोड़ लीटर उत्पादन क्षमता स्थापित की जा रही है।