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यूपी: सीएम योगी बोले पुलिस की इमेज में हुआ है बड़ा बदलाव, अपराधियों के मन में बैठा भय; आम लोगों को मिली राहत

Sat, 27 Dec 2025 10:22 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

UP Police Manthan: इस कार्यक्रम में सीएम योगी ने कहा कि आज यूपी पुलिस अपराधियों के लिए भय और आम नागरिकों के लिए विश्वास व सम्मान का भाव स्थापित कर रही है। 
 
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कार्यक्रम में सीएम योगी, साथ में यूपी के डीजीपी। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश की कानून-व्यवस्था एक बड़ी चुनौती थी। आठ साल के भीतर यूपी पुलिस ने कानून-व्यवस्था में सुधार ने पुलिसिंग की छवि बदली है। यूपी का ‘रूल ऑफ लॉ’ का मजबूत उदाहरण बन चुका है। इससे अपराधियों में भय के साथ ही जनता में विश्वास बढ़ा है। सीएम ने अधिकारियों को नसीहत देते हुए कहा कि यूपी पुलिस के कार्यों की सराहना न सिर्फ देश में हो रही है बल्कि विदेशों में भी हो रही है, लेकिन सराहना के साथ काम का असर धरातल पर दिखे तभी इसे अपनी उपलब्धि समझना चाहिए।

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पुलिस मुख्यालय में शनिवार को आयोजित दो दिवसीय ‘पुलिस मंथन’ वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सम्मेलन-2025 में अध्यक्षता कर रहे सीएम ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि एक वक्त था जब लोगों के मन में असुरक्षा का भाव था। वह अपराधियों के दहशत में रहते थे। पुलिस प्रशिक्षण भी कमजोर था लेकिन जब से भाजपा की सरकार बनी है तब से कानून-व्यवस्था का राज स्थापित हुआ। पुलिसिंग व्यवस्था में बड़े पैमाने पर सुधार किए गए हैं। साढ़े आठ साल में 2.19 लाख भर्तियां की गईं। वर्तमान में 60,244 पुलिसकर्मियाें की ट्रेनिंग चल रही है। सीएम ने बीट पुलिसिंग पर जोर दिया। इस मौके पर सीएम ने ‘यक्ष’ ऐप का लोकार्पण किया। इस अवसर पर प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद और डीजीपी राजीव कृष्णा समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

सात जिलों में कमिश्नरेट लागू किया, हर जिले में बने साइबर थाने
सीएम ने कहा कि कानून-व्यवस्था बेहतर करने के लिए प्रदेश के सात जिलों में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली को लागू किया गया। वहीं जहां प्रदेश में पहले सिर्फ दो साइबर थाने हुआ करते थे आज प्रत्येक जिले में साइबर थाना है। हर थाने में एक साइबर हेल्प डेस्क भी बनाई गई है। अगर फोरेंसिंक लैब की बात करें तो वर्तमान में 12 अत्याधुनिक लैब तैयार हो चुकी हैं। छह नई लैब का काम जारी है। यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस ने अत्याधुनिक प्रशिक्षण केंद्र के रूप में पहचान बनाई है।
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यूपी-112 का रेस्पांस टाइम अब 6-7 मिनट
सीएम ने कहा कि प्रदेश में एसडीआरएफ और यूपीएसएसएफ जैसी स्पेशल यूनिट गठित की गईं जो बेहद प्रभावी साबित हो रही हैं। पुलिस बैरकों को भी हाईटेक बनाया जा रहा है और उनको हर एक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। यूपी-112 के बारे में सीएम ने कहा कि एक वक्त 60-65 मिनट रेस्पांस टाइम होता था आज हेल्पलाइन पर कॉल करने के बाद छह से सात मिनट में पीआरवी मौके पर पहुंच रही है।
 

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सीएम ने दिए अहम 10 निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala
1- ग्राम पंचायत स्तर पर तैनात चौकीदारों को पुलिस बीट व्यवस्था से जोड़ा जाए। इससे गांवों की सुरक्षा तंत्र को मजबूती मिलेगी। अपराध नियंत्रण पाने में आसानी होगी।

2- बीट पुलिस के सिपाही व दरोगा गांव स्तर पर लगातार जनसंपर्क करें और लोगों से संवाद करते रहें। जमीन स्तर की जानकारी मिलेगी जो कानून-व्यवस्था सुधारे में मदद करेगी।

3- मिशन शक्ति केवल पुलिस प्रयास तक ही सीमित नहीं है। ये सभी विभागों के समन्वय से संभव है। महिला सुरक्षा प्रभावी बनाने के लिए सभी विभागों को योजनाबद्ध तरीके से काम करना होगा।

4- महिलाओं की सुरक्षा दो स्तरों पर सुनिश्चित करना जरूरी है। आंतरिक और बाह्य सुरक्षा। परिवार और समाज में ऐसा वातावरण बने, जहां महिलाएं बिना भय के अपनी पीड़िा साझा करें। वहीं सार्वजनिक स्थलों पर एंटी रोमियो स्क्वॉड व महिला बीट सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करें।

5- संरचना सुधार के तहत करीब 50,000 पुलिसकर्मियों को थानों में तैनात करने की जरूरत है। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अलग-अलग मॉडल के आधुनिक थाने, पार्किंग, बैरक, पब्लिक-सर्विस स्पेस जैसी सुविधाओं के साथ विकसित करने की आवश्यकता है।

6- चेन स्नेचिंग, लूट, महिलाओं के खिलाफ अपराध जनता में असुरक्षा और नकारात्मक धारणा पैदा करते हैं। इस पर प्रभावी कार्रवाई हो और जो भी अफसर जिम्मेदार हों उनकी जिम्मेदारी तय की जाए।

7- ग्राम पंचायत में नियुक्त बीसी सखी और बैंकों के बैंकिंग सदस्य के साथ समन्वय बनाकर ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में डिजिटल लेन-देन सुरक्षा पर जागरूकता अभियान चलाएं। जिससे साइबर अपराध पर अंकुश लगाया जा सके।

8- पुलिस लाइन को केवल प्रशासनिक इकाई तक सीमित न रखें। उसे जन-जागरूकता व सामाजिक सहभागिता के केंद्र के रूप में विकसित करें। पुलिस म्यूजियम, ट्रैफिक पार्क/स्तंभ की स्थापना कर स्कूली बच्चों को पुलिस कार्यप्रणाली और यातायात नियमों से रूबरू कराएं।

9- दहेज उत्पीड़न जैसे मामलों में बेहद संवेदनशीलता व गहन जांच के साथ कार्रवाई की जाए। जिससे निर्दोष परिवारों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

10- जेल में बंद माफिया व संगठित अपराधियों पर कड़ी निगरानी करें। उनकी पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से ही कराएं।

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