भूमि का क्षैतिज विस्तार अब संभव नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कृषि योग्य भूमि का क्षैतिज विस्तार अब संभव नहीं है, इसलिए ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य के लिए उत्पादन बढ़ाने का एकमात्र रास्ता इकाई क्षेत्रफल से अधिक फसल उत्पादन है। उन्होंने कहा कि 'गन्ना आधारित अंतःफसली खेती उत्तर प्रदेश के कृषि भविष्य का नया मॉडल है। यह किसानों को अधिक उत्पादन, अधिक कमाई और जोखिम से सुरक्षा तीनों प्रदान करती है।
मुख्यमंत्री ने इस योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक मिशन मोड में लागू करने के निर्देश दिए। वर्तमान में प्रदेश में 29.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है, जिसमें 14.64 लाख हेक्टेयर नया बोया गया क्षेत्र और 14.86 लाख हेक्टेयर पेड़ी शामिल है।
उन्होंने कहा कि इतने बड़े क्षेत्र में तिलहन और दलहन की अंतःफसल जोड़ने से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और साथ ही प्रदेश एवं देश की तिलहन-दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि कृषि विज्ञान केंद्र एवं कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से क्रियान्वित करते हुए अंतःफसल का चयन वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक आधार पर किया जाए।
मूंग को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया
उन्होंने आईआईएसआर की सिफारिशों के अनुसार रबी सीजन में सरसों और मसूर तथा जायद सीजन में उर्द और मूंग को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गन्ने की पैदावार प्रभावित किए बिना अतिरिक्त फसल, अतिरिक्त लाभ और अतिरिक्त सुरक्षा, यही इस मॉडल की सबसे बड़ी ताकत है।
उन्होंने इस योजना के लिए वर्षवार रोडमैप तैयार करने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अतिरिक्त उत्पादन सीधे किसानों की आय में वृद्धि करेगा और राज्य के जीवीए में बड़ा योगदान देगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए सहायता और अनुदान का ढांचा स्पष्ट होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बड़े पैमाने पर अंतःफसलों को अपनाने से किसानों को तेज नकदी प्रवाह मिलेगा और एकल फसल जोखिम कम होगा, जिससे कृषि अधिक स्थिर और टिकाऊ बनेगी। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल गन्ना क्षेत्र से जुड़े किसानों के लाभ तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे प्रदेश के व्यापक कृषि परिदृश्य के परिवर्तन के रूप में लागू किया जाना चाहिए।