सीएम योगी ने कहा कि विदेशी आक्रांताओं की विरासत पर गौरव की अनुभूति करने वाले महाकुंभ को नहीं समझ पाएंगे। इसीलिए उनको कुंभ का आयोजन, अयोध्या का विकास, काशी का कायाकल्प और मथुरा-वृंदावन का सौंदर्य अच्छा नहीं लगता है। उनको बांटना अच्छा लगता है। वह जाति, क्षेत्र, भाषा और अन्य मुद्दों के आधार पर बांटेंगे। फिर राजनीतिक रोटी सेंकने का काम करेंगे। उन लोगों से कोई उम्मीद नहीं की जा सकती है।
2 लाख करोड़ तक की आर्थिक वृद्धि का अनुमान
योगी ने कहा कि उनको अभी तक पता ही नहीं है कि नदी को चैनलाइज करके उसकी आयु बढ़ाई जाती है, ना कि उसके प्राकृतिक प्रभाव को अवरुद्ध किया जाता है। महाकुंभ जैसे आयोजनों का प्रदेश और देश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। 2019 में कुंभ के दौरान प्रदेश की आर्थिक वृद्धि में 1.2 लाख करोड़ रुपये का योगदान हुआ था। इस बार 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है, जिससे प्रदेश को 2 लाख करोड़ रुपये तक की आर्थिक वृद्धि होने का अनुमान है।
सीएम ने कहा कि श्रद्धालु जब प्रदेश में आते हैं तो परिवहन, आवास, भोजन और अन्य सेवाओं पर खर्च करते हैं, जिससे स्थानीय व्यवसाय और रोजगार को बढ़ावा मिलता है। 2024 में वाराणसी में 16 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने काशी विश्वनाथ के दर्शन किए। वहीं अयोध्या में जनवरी 2024 से सितंबर तक श्रद्धालुओं की संख्या 13.55 करोड़ से अधिक रही है।