एफएसडीए के संयुक्त आयुक्त हरिशंकर सिंह बताते हैं कि अगर केला बहुत चमकीला, ज्यादा पीला या असमान रंग का लगे तो समझ लें कि उसमें रसायन का इस्तेमाल ज्यादा हुआ है। रसायन से पके केले बाहर से सख्त और अंदर से अधपके होते हैं। रसायन के प्रभाव से बचने के लिए फल को कुछ देर तक पानी में भिगो देना चाहिए। पानी में डालते ही कई बार ऊपर से छिड़का गया रसायन तैरने लगता है। वहीं, चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि मानक से ज्यादा मात्रा में रसायन का इस्तेमाल होने से फल स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो जाता है। रसायन से पके फल जल्दी खराब भी हो जाते हैं और स्वाद में हल्की कड़वाहट भी होती है।
कैंसर का बढ़ता है खतरा
केजीएमयू के पूर्व विभागाध्यक्ष न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. आरके गर्ग का कहना है कि एथेफॉन व कार्बाइड में मौजूद आर्सेनिक और फॉस्फोरस जैसे तत्व त्वचा, पाचन तंत्र और सांस की नलियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे न्यूरोलॉजिकल समस्याएं, आंत में सूजन और कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। ये रसायन शरीर में पहुंचने पर धीरे-धीरे कोशिकाओं को जला देते हैं। हार्मोन का संतुलन भी खराब होता है। केला ही नहीं अन्य फलों में केमिकल का अंधाधुंध प्रयोग मानव जीवन के लिए खतरा है।
शरीर को खोखला कर रहे रसायन
केजीएमयू के गैस्ट्रोलाजी विभागाध्यक्ष डॉ. सुमित रूंगटा का कहना है कि किसान खेत में रासायनिक खाद का अधिक प्रयोग करते हैं फिर विक्रेता फल एवं सब्जी में अलग-अलग तरह से रसायन का छिड़काव करते हैं। कभी पकाने के नाम पर तो कभी चमकदार बनाने के लिए। यही वजह है कि लिवर व पेट से जुड़ी बीमारियों के मरीज बढ़ रहे हैं। ये रसायन शरीर को अंदर से खोखला कर रहे हैं। इंसान के जीवन के लिए खतरा बढ़ रहा है।