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UP: चौधरी सुनील सिंह का सरकार पर हमला, बोले- 543 सांसदों की आवाज नहीं सुनी जाती तो 850 की कैसे सुनी जाएगी?

Fri, 14 Aug 2026 02:15 PM IST
Akash Dwivedi डिजिटल डेस्क, लखनऊ

सार

लोकदल अध्यक्ष ने संसद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सांसदों की संख्या बढ़ाने से पहले जनता की आवाज सुनी जानी चाहिए। उन्होंने किसानों, मजदूरों, युवाओं, रोजगार, महंगाई और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा। साथ ही संसद में धन की बर्बादी और एफसीआरए बदलाव पर भी सवाल उठाए।
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लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह ने संसद की कार्यप्रणाली और जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि जब संसद में मौजूद 543 सांसदों की आवाज नहीं सुनी जाती तो 850 सांसदों की आवाज कैसे सुनी जाएगी। संसद में सांसदों की संख्या बढ़ाने के बजाय सरकार को किसानों, मजदूरों, युवाओं, रोजगार, बेरोजगारी, महंगाई और ग्रामीण समस्याओं जैसे मुद्दों पर जवाब देना चाहिए।

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उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। जरूरी है कि सांसदों की आवाज सुनी जाए और जनता से जुड़े सवालों पर सार्थक चर्चा हो। संसद को जनता की समस्याओं के समाधान का सर्वोच्च मंच बनाया जाना चाहिए।

संसद के 175 करोड़ के नुकसान पर सवाल

चौधरी सुनील सिंह ने संसद के कामकाज में व्यवधान के कारण होने वाले कथित 175 करोड़ रुपये के नुकसान पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि संसद जनता के पैसे से चलती है। यदि कामकाज बाधित होने से इतना बड़ा आर्थिक नुकसान होता है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने भाजपा से पूछा कि जनता के पैसे से हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा।

 

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एफसीआरए विधेयक पर सरकार से मांगा जवाब

एफसीआरए से संबंधित विधेयक पर उन्होंने सरकार से स्पष्ट करने को कहा कि कानून में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम अमेरिका के दबाव में उठाया जा रहा है। सरकार को देश की जनता के सामने इसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

महिलाओं को 50 हजार सालाना देने के वादे पर भी सवाल

महिलाओं को सालाना 50 हजार रुपये देने की चुनावी घोषणा पर भी चौधरी सुनील सिंह ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार महिलाओं को आर्थिक सहायता दे सकती है तो पिछले दस वर्षों में भी यह किया जा सकता था। चुनाव के समय ही ऐसे वादे क्यों किए जाते हैं। सरकार को यह भी बताना चाहिए कि जिन राज्यों में ऐसे वादे किए गए, वहां कितने पूरे हुए और कितनी महिलाओं को लाभ मिला।

उन्होंने कहा कि किसान, मजदूर, महिला, युवा और आम नागरिक के भविष्य से जुड़े मुद्दे संसद की प्राथमिकता होने चाहिए। संसद में संख्या बढ़ाने से पहले सरकार जनता के सवालों का जवाब दे और संसद के समय व सार्वजनिक धन की बर्बादी की जवाबदेही तय करे।
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