गाजियाबाद से सत्तर साल के बुजुर्ग आजाद सिंह चौधरी न्याय की उम्मीद में राजधानी आए हैं। उनकी बेटी बीए सेकंड ईयर की छात्रा थी। बीते 2 अप्रैल से घर से अचानक गायब हो गई। रोते हुए उन्होंने बताया कि गायब होने के दो माह पहले से ही वह छांगुर गिरोह के संपर्क में थी और मजार जाने लगी थी। किसी ने बताया कि ब्रेनवाश कर उसको मुसलमान बना दिया गया। उसका निकाह भी करा दिया गया है। बहुत तलाशा, पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाई, कहीं कुछ पता नहीं चला।
मां विक्षिप्त हो गई है। नींद से जाग कर, जब तब बेटी को पुकारती हैं। तनाव से मां की किडनी भी खराब हो गई। अपनी व्यथा बताते हुए बात-बात में बुजुर्ग आजाद की आंखें भर आ रही थीं।
मेरठ से आए सुनील नेगी ने बताया कि छांगुर गैंग के बदर अख्तर सिद्दीकी ने उनकी बहन को हिन्दू नाम से लव जिहाद का शिकार बनाया। 2019 से उनकी बहन लापता है। बहन नोएडा में प्राइवेट सेक्टर में काम करती थी, जहां बदर ने ब्रेनवाश कर उसे अपने जाल में फंसाया। जब तक बहन को एहसास हुआ तब तक बहुत देर हो चुकी थी। घरवालों को उसने फोन पर सारी बात बताई। बताया कि बदर ने उसका जबरन धर्म परिवर्तन करवा दिया। सारी बचत के पैसे हड़प लिए। मेरठ की ही एक लड़की प्रिया त्यागी भी गायब हो गई जिसका अभी तक कुछ पता नहीं चला।
रघुनाथ निषाद और उनकी पत्नी उर्मिला
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बलरामपुर से आए रघुनाथ निषाद और उनकी पत्नी उर्मिला का रो रो कर बुरा हाल था। रघुनाथ पेशे से दिहाड़ी मजदूर हैं। बताया कि बेटी की शादी तय की गई थी। घर के पास की मुस्लिम महिला अनारकली और उसके मामा ने मेरी बेटी का ब्रेनवाश किया और भगा ले गए। कहते थे कि छांगुर पीर की शरण में जाओगे तो जिंदगी बेहतर हो जाएगी।
मेरठ से आई लक्ष्मी ने बताया कि उनके पति के देहांत के बाद छांगुर और उसके ग्रुप से जुड़े लोगों ने दादरी में मौजूद उनकी सारी जमीन पर कब्जा कर वहां मस्जिद और मजार बनवा लिया। इस मस्जिद के भीतर अब धर्मांतरण और अन्य गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है।
छांगुर का सपना भारत को मुस्लिम राष्ट्र बनाने का था
विश्व हिंदू रक्षा परिषद के अध्यक्ष गोपाल राय ने कहा कि छांगुर का कनेक्शन जाकिर नाइक से भी मिला है। जिसे सरकार ने भगोड़ा घोषित किया है। ये सभी मिलकर भारत को मुस्लिम राष्ट्र बनाना चाहते थे। जब से छांगुर की करतूतों को उजागर किया गया तब से लगातार बड़ी संख्या में उसके जेहाद से पीड़ित लोग सामने आ रहे हैं। गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ और बलरामपुर से पीड़ित आए हैं। इनमें अधिकतर वे लोग हैं जिनकी बच्चियों को बहकाकर धर्मांतरण कराया गया। उसके बाद से वे लौटकर नहीं आईं।