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यूपी: सीईओ बोले- यूपी में पूरी पारदर्शिता से हुआ एसआईआर, रहस्यमय मतदाता जोड़े जाने संबंधी आरोप बेबुनियाद

Tue, 06 Oct 2026 09:15 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

आयोग का कहना है कि फॉर्म-6 की स्वीकृति के प्रतिशत को लेकर रिपोर्ट में लगाए गए आरोप काल्पनिक और बेबुनियाद धारणाओं पर आधारित हैं। फॉर्म स्वीकार करने का कोई निश्चित प्रतिशत या फॉर्मूला नहीं होता, बल्कि नियमानुसार पूरी प्रक्रिया का पालन करने के बाद ही आवेदन स्वीकार किए जाते हैं। 
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मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची (एसआईआर) में 16 लाख से ज्यादा रहस्यमय मतदाता जोड़े जाने संबंधी आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) का कार्य पूरी पारदर्शिता के साथ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950, निर्वाचक पंजीकरण नियम 1960 और भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही संपन्न कराया गया है।

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उन्होंने एक्स के माध्यम से बताया है कि गणना चरण (27 अक्टूबर 2025 से 6 जनवरी 2026) के दौरान बीएलओ ने घर-घर जाकर नाम जोड़ने के लिए फॉर्म-6 एकत्र किए। ये फॉर्म उन पात्र व्यक्तियों से भरवाए गए थे, जिनके नाम 27 अक्तूबर 2025 तक की मतदाता सूची में शामिल नहीं थे। नाम छिपाने या सार्वजनिक न करने के आरोपों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि निर्वाचक पंजीकरण नियम 1960 के अनुसार केवल उन्हीं फॉर्म-6 के आवेदनों को दावा सूची (फॉर्म-9) में शामिल किया जाता है, जो 6 जनवरी 2026 को ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद प्राप्त होते हैं। इन्हें दावा एवं आपत्ति अवधि के दौरान सीईओ यूपी की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रदर्शित भी किया गया था। इसमें किसी भी नियम या कानून का उल्लंघन नहीं हुआ है।

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आयोग का कहना है कि फॉर्म-6 की स्वीकृति के प्रतिशत को लेकर रिपोर्ट में लगाए गए आरोप काल्पनिक और बेबुनियाद धारणाओं पर आधारित हैं। फॉर्म स्वीकार करने का कोई निश्चित प्रतिशत या फॉर्मूला नहीं होता, बल्कि नियमानुसार पूरी प्रक्रिया का पालन करने के बाद ही आवेदन स्वीकार किए जाते हैं। निर्वाचन कार्यालय ने दोहराया कि यूपी में एसआईआर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, कानूनसम्मत और सभी राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी के साथ पूरी की गई है।

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