प्रदेश में कोरोना की तीसरी लहर को कमजोर करने के लिए लोगों को मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा। बाजारों में भीड़ कम रही तो वायरस के खतरनाक वेरिएंट से भी मुकाबला किया जा सकेगा। यह कहना है राज्य स्तरीय चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम का। टीम ने अपनी रिपोर्ट में मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग को अहम बताया है। साथ ही सभी डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल को कुछ दिन तक बनाए रखने की बात कही है।
शासन की ओर से चिकित्सा विशेषज्ञों की राज्यस्तरीय परामर्शदाता कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी ने तीसरी लहर की आशंका अगस्त से अक्तूबर के बीच माना है, लेकिन 2 दिन पहले शासन को भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि लॉकडाउन खुलने के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क का अनिवार्य रूप से प्रयोग होना चाहिए। टीम ने बताया है कि इन दिनों प्रदेश में कोविड मरीजों की रिकवरी दर फरवरी से बेहतर है। लेकिन जिस तरह से विभिन्न राज्यों में कोरोना वायरस के मरीज मिल रहे हैं, उससे खतरा कम नहीं हुआ है। ऐसे में सरकारी तंत्र को सुरक्षात्मक उपायों का कड़ाई से पालन कराना होगा।
मास्क का अनिवार्य रूप से करें इस्तेमाल
हर व्यक्ति को अपने स्तर पर सावधानी बरतनी होगी। जब भी बाहर निकलें मास्क का अनिवार्य रूप से प्रयोग करें। कोरोना संक्रमण कम हुआ है, लेकिन खतरा टला नहीं है। विभिन्न राज्यों से लोगों का आवागमन शुरू हो गया है। ऐसे में अपने अगल-बगल मौजूद हर व्यक्ति को पॉजिटिव मानकर चलें। एसजीपीजीआई सहित अन्य चिकित्सा संस्थानों में गंभीर मरीजों की सहूलियत को देखते हुए ओपीडी शुरू की गई है, लेकिन बिना मास्क अस्पताल आना खतरनाक है।
- प्रो. आरके धीमान, निदेशक एसजीपीजीआई
पहले की तरह सावधानी बरतना जरूरी
प्रदेश में मरीजों की संख्या में लगातार गिरावट हो रही है। यह गिरावट देखकर लोग लापरवाह हुए तो फिर समस्या खड़ी हो जाएगी। मरीजों की संख्या में कमी आ रही है, यह अच्छी बात है। लेकिन 2 माह तक हर व्यक्ति को पहले की तरह ही सावधानी बरतनी होगी। बाहर निकलने पर मास्क लगाएं और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। इससे किसी दूसरे राज्य से आने वाले व्यक्ति के साथ कोई नया वेरिएंट आता है तो उसे भी रोका जा सकेगा।
- प्रो डी हिमांशु , चिकित्सा अधीक्षक केजीएमयू।