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यूपी: 68,500 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने राजभर का आवास का घेरा, बोले- न्याय करो; पुलिस से धक्का-मुक्की

Tue, 29 Sep 2026 05:54 PM IST
Akash Dwivedi डिजिटल डेस्क, लखनऊ

सार

68,500 सहायक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने नियुक्ति की मांग को लेकर मंत्री ओम प्रकाश राजभर के आवास के बाहर प्रदर्शन किया। अभ्यर्थियों ने आरक्षण संबंधी विसंगतियां दूर करने और संशोधित चयन सूची जारी करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान पुलिस से धक्का-मुक्की हुई। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे करीब आठ साल से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।
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अभ्यर्थियों ने राजभर का आवास का घेरा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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68,500 सहायक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने नियुक्ति की मांग को लेकर सोमवार को लगातार दूसरे दिन प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के आवास पहुंचे और बाहर बैठकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने ‘राजभर चाचा न्याय करो’ के नारे लगाए। करीब आधे घंटे तक चले प्रदर्शन के दौरान पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।

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पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाने का प्रयास किया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि उन्हें जबरन हटाकर ईको गार्डन भेज दिया गया। कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बदसलूकी और कपड़े फाड़ने का भी आरोप लगाया। प्रदर्शन के दौरान ‘ऐसी क्या मजबूरी है-आरक्षण की चोरी है’ और ‘पिछड़ा आयोग ने माना है-आरक्षण घोटाला है’ जैसे नारे लगाए गए।

मंत्री ने अभ्यर्थियों से की मुलाकात

प्रदर्शन के दौरान ओम प्रकाश राजभर ने अभ्यर्थियों को बातचीत के लिए बुलाया और उनसे मुलाकात की। अभ्यर्थी 2018 की 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण से जुड़ी विसंगतियों को दूर करने, संशोधित चयन सूची जारी करने और पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की मांग कर रहे हैं। ऐसी ही मांगों को लेकर अभ्यर्थियों ने इससे पहले भी लखनऊ में प्रदर्शन किया है।

 

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‘आठ साल से नियुक्ति का इंतजार’

प्रदर्शन में शामिल अभ्यर्थी नवीन ने दावा किया कि 10 सितंबर को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह और माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी से उनकी मुलाकात हुई थी। उनके अनुसार बैठक में अधिकारियों की मौजूदगी में भर्ती से जुड़ी गड़बड़ियों पर चर्चा हुई थी। अभ्यर्थियों का यह भी दावा है कि राज्य और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने आरक्षण संबंधी विसंगतियों को लेकर निर्देश दिए हैं।

अभ्यर्थी आशुतोष वर्मा ने कहा कि जब तक भर्ती का शेड्यूल जारी नहीं होता, उनका संघर्ष जारी रहेगा। उनका कहना है कि 2018 में भर्ती के लिए आवेदन करने के बाद से वे नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं और करीब आठ साल से इस मामले के समाधान की मांग कर रहे हैं।
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