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यूपी: हर बूथ पर चला नए वोटर जोड़ने का अभियान, चुनाव आयोग की चेतावनी- गलत जानकारी पर होगी जेल

Sat, 17 Oct 2026 10:51 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

SIR in UP: यूपी के हर बूथ पर शनिवार को नए वोटरों को जोड़ने का अभियान चला। ऐसा ही एक अभियान 24 अक्तूबर को भी चलाया जाएगा। 
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नए मतदाता जोड़ने का अभियान।
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विस्तार
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प्रदेश में विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची में छूटे हुए पात्र नागरिकों और पहली बार बनने वाले युवाओं के नाम शामिल करने के उद्देश्य से शनिवार को प्रदेश के सभी बूथों पर विशेष शिविर लगाए गए। इसके अंतर्गत पात्र नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और युवाओं के नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए फॉर्म-6 भरवाए गए।

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मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि पर्यवेक्षण के दौरान बूथ पर बीएलओ और आए हुए नागरिकों से संवाद भी किया गया। यह सुनिश्चित किया गया कि बीएलओ मतदाता सूची, पूरक सूची और पर्याप्त मात्रा में फॉर्म-6 के साथ निर्धारित समय पर बूथों पर उपस्थित रहें। उन्होंने बताया कि प्रदेश के ईपी (मतदाता-आबादी) अनुपात और जेंडर अनुपात में वृद्धि जन जागरूकता से ही संभव है। उन्होंने मतदाताओं से अपील की है कि 24 अक्तूबर को होने वाले विशेष शिविर में अपना और परिवार के सदस्यों के नाम बूथ पर जाकर जांच लें। 

अगर नाम शामिल न हो तो फॉर्म-6 भरकर अपने बीएलओ को जमा करें। इसके अलावा ऑनलाइन पोर्टल-voters.eci.gov.in पर या ECINET मोबाइल एप के माध्यम से भी आवेदन कर सकते हैं। रिणवा ने लखनऊ कैंट विधानसभा क्षेत्र के मतदान केंद्र सेंट ऐग्नेस लोरेटो डे स्कूल, स्टेशन रोड और लखनऊ मध्य विधानसभा क्षेत्र के मतदान केंद्र संस्कृत विद्यापीठ विशाल खंड, गोमती नगर का निरीक्षण किया।

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गलत जानकारी देने पर होगी जेल

 प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने फॉर्म-7 के आवेदनों पर कड़ाई से नियमों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि जानबूझकर झूठी घोषणा करने पर एक वर्ष तक का कारावास या जुर्माना हो सकता है। दोषी व्यक्ति को दोनों से भी दंडित किया जा सकता है। फॉर्म-7 में आवेदक से निर्धारित घोषणा प्राप्त की जाती है। जांच में आपत्ति मिथ्या पाए जाने पर आवेदक के विरुद्ध कार्रवाई होगी। केंद्रीय चुनाव आयोग ने 9 अक्तूबर को इस संबंध में निर्देश जारी किए थे। इन निर्देशों के अनुसार फॉर्म-7 से प्राप्त आपत्तियों की जांच नियमानुसार होनी चाहिए। उन्होंने व्यापक प्रचार-प्रसार के भी निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य आमजन को मिथ्या घोषणा के कानूनी परिणामों के प्रति जागरूक करना है।
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