उप्र परिवहन निगम के 23 बस अड्डों को निजी सावर्जनिक सहभागिता (पीपीपी) से विकसित किए जाने की मशक्कत फिर शुरू हुई है। 18 स्टेशनों के लिए किसी भी निजी सहभागी ने टेंडर नहीं डाला। अब फिर से इनके लिए टेंडर होगा। मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में इसके प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।
पीपीपी पद्धति पर बस अड्डों को बिल्ड फाइनेंस ऑपरेट एंड ट्रांसफर मॉडल पर विकसित किए जाने की कवायद की जा रही है। इसके लिए परिवहन निगम ने 23 बस अड्डों को चुना था। पिछले वर्ष इसके लिए निविदाएं आमंत्रित की गई थी। इनमें 9 बस अड्डों के लिए ही कंपनियों ने टेंडर डाले। इसमें से एक का टेंडर तकनीकी कारण से रद्द हो गया। ऐसे में केवल आठ बस अड्डों के लिए वित्तीय निविदा खोली गई। कानपुर, बरेली तथा लखनऊ चारबाग बस अड्डे का टेंडर खुला तो समिति को इसके लिए डाली गई रकम कम लगी। ऐसे में तीनों की निविदाएं भी रद्द कर दी गईं। बाकी पांच बस अड्डों गोमतीनगर लखनऊ, सिविल लाइन प्रयागराज, कौशांबी गाजियाबाद, पुराना गाजियाबाद तथा आगरा फोर्ट की बिड को फाइनल मंजूरी दे दी गई।
अब इन 18 की दोबारा बिड
लखनऊ चारबाग, अमौसी, वाराणसी कैंट, कानपुर सेंट्रल झकरकटी, जीरो रोड प्रयागराज, सोहराब गेट मेरठ, आगरा का ट्रांसपोर्ट नगर व ईदगाह, रसूलाबाद अलीगढ़, मथुरा ओल्ड, गोरखपुर, साहिबाबाद, अयोध्याधाम, बरेली, बुलंदशहर, गढ़मुक्तेश्वर, मिर्जापुर, रायबरेली बस अड्डे की दोबारा निविदाएं आमंत्रित की जाएंगी।
अन्य वन उपज अभिवहन नियमावली, 1978 को सरल बनाने का प्रस्ताव मंजूर
इमारती लकड़ी और अन्य वन उपज के परिवहन के ट्रांजिट पास प्रदेश की सीमा के बाहर भी मान्य होंगे। इससे परिवहन लागत में कमी के साथ ही समय की बचत भी होगी। इसके लिए मंगलवार को उत्तर प्रदेश इमारती लकड़ी और अन्य वन उपज का अभिवहन नियमावली, 1978 को सरल बनाने को प्रस्ताव को कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी।
अभी तक जारी होने वाले पास प्रदेश की सीमा के भीतर ही मान्य होते हैं। अन्य प्रदेशों में प्रवेश के दौरान अंतर्राज्यीय अभिवहन में व्यवधान पैदा होता है। इस समस्या को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने नेशनल ट्रांजिट पास सिस्टम (एनटीपीएस) पोर्टल विकसित किया है। इसके माध्यम से पूरे देश में मान्य अभिवहन पास जारी करने की व्यवस्था की गई है। एनटीपीएस से जारी पास को मान्यता देने के लिए उत्तर प्रदेश इमारती लकड़ी और अन्य वन उपज का अभिवहन नियमावली, 1978 में संशोधन के संबंध में अधिसूचना जारी करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी गई है।
इसके तहत इमारती लकड़ी, बांस और अन्य लघु वन उत्पादों के लिए वन दफ्तरों में जाए बिना ऑनलाइन ट्रांजिट पास जारी हो सकेंगे। कारोबारी सुगमता के लिए लकड़ी, बांस और अन्य लघु वन उपज के अभिवहन के लिए पूरे देश के लिए एक पास जारी किया जाएगा।