गोरखपुर में गोड़धोईया नाला और रामगढ़ ताल के जीणोंद्धार का रास्ता साफ हो गया है । इसके लिए सरकार द्वारा तैयार कराई गई कार्ययोजना पर आने वाले 989 करोड़ के व्ययभार को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। साथ ही पहली किश्त के तौर 75 प्रतिशत धनराशि डीएम को उपलब्ध कराने का भी फैसला किया गया है।
दरअसल शहर के सबसे बड़े गोड़धोईया नाले (13 किमी लंबे) के जरिए शहर का गंदा पानी रामगढ़ ताल में जा रहा है । जिससे ताल में प्रदूषण बढ़ रहा है। इसके मद्देनजर सरकार ने नाला और रामगढ़ ताल का जीर्णोद्धार कराने के लिए कार्ययोजना तैयार कराया था । इसके लिए सरकार ने वित्तीय वर्ष 2023-204 के बजट में 650 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था । लेकिन धनराशि जारी नहीं होने से काम शुरू नहीं हो पा रहा था।
गोरखपुर के डीएम ने बजट उपलब्ध कराने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा था । इसी कड़ी में आवास विभाग ने नाला व रामगढ़ ताल के जीर्णोंद्धार पर आने वाले व्ययभार के प्रस्ताव को कैबिनेट में रखा था, जिसे मंजूरी दे दी गई है । यह धनराशि नाला डायवजर्न के लिए भूमि अधिग्रहण के अलावा इंटरसेप्टर और एसटीपी स्थापित करने पर खर्च किया जाएगा।
प्रदेश के शहरी और ग्रामीण इलाकों की राशन दुकानों को इलेक्ट्रानिक तराजू और ई पॉस मशीनों से लैस करने के लिए नए टेंडर पड़ेंगे। टेंडर प्रस्ताव के लिए यूपी डेस्को को कार्यदायी संस्था के रूप में नामित किया गया है। मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।
प्रदेश की प्रत्येक राशन दुकान में पांच साल के लिए ई पॉस मशीनों की स्थापना की गई थी। इसे सिस्टम इंटीग्रेटर पर आधारित बीओओ मॉडल (बिल्ड, ओन, आपरेट) पर लगाया गया था। मई में पांच साल का अनुबंध समाप्त हो गया था। अब इलेक्ट्रानिक तराजू और ई पॉस मशीनों की स्थापना और संचालन के लिए नए सिरे से ई टेंडर की कार्यवाही होगी।
टेंडर हासिल करने वाली संस्था को ई तराजू और ई पॉस मशीनें लगाने और संचालन का जिम्मा दिया जाएगा। टेंडर से संबंधित सभी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए यूपी डेस्को को नामित किया गया है। यूपी डेस्को द्वारा तैयार प्रस्ताव के आधार पर प्री-बिड में प्राप्त सुझावों को खाद्यायुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति अनुमोदित करेगी। इसके बाद प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जाएगा और ई टेंडर लिए जाएंगे।
मौसम विभाग की भविष्यवाणी को देखकर यदि किसान को लगा कि अब फसल को खतरा है तो जोखिम शुरू होने से एक दिन पहले भी पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत वह अपनी फसल का बीमा करा सकेगा। इसकी अंतिम तारीख की बाध्यता समाप्त कर दी गई है। इससे किसानों को बड़ा लाभ होगा। मंगलवार को कैबिनेट ने खरीफ 2023 से रबी 2025-2026 तक प्रधानमंत्री फसल बीमा तथा पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना को हरी झंडी दे दी।
प्राकृतिक आपदाओं, रोगों, कृमियों से फसल के नुकसान की भरपाई के लिए किसानों को इन दोनों ही योजनाओं में बीमा कवर दिया जाता है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना प्रदेश भर में जबकि औद्यानिक फसलों से जुड़ी पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना को 51 जिलों में लिए लागू किया गया है। कैबिनेट ने इस योजना को आगे जारी रखने को मंजूरी दे दी। इसके लिए रबी की फसल में किसानों की ओर से बीमा के लिए दिया जाने वाला प्रीमियम 1.5 प्रतिशत तथा आवेदन करने की तारीख 31 दिसंबर, खरीफ की फसल के लिए प्रीमियम 2 प्रतिशत तथा आवेदन करने की तारीख 31 जुलाई ही रखा गया है। उधर पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना में यह प्रीमियम 5 प्रतिशत रखा गया है। जबकि आवेदन करने की तारीख की बाध्यता समाप्त कर दी गई है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि अब जोखिम शुरू होने के एक दिन पहले तक इस योजना में बीमा कराया जा सकता है।
खरीफ की बीमित फसल - धान, ज्वार, बाजरा, मक्का, उर्द, मूंग, अरहर, मूंगफली, तिल एवं सोयाबीन (10 फसलें)
रबी की बीमित फसल - गेहूं, जौ, चना, मटर, मसूरी, सरसों या लाही, अलसी, आलू (8 फसलें)
उद्यान की फसलें जिन्हें पुनर्गठन मौसम आधारित योजना में रखा गया है। (7 फसलें) - केला, मिर्च, पान, टमाटर, शिमला मिर्च, हरी मटर, आम
इन जिलों में यह है योजना
खरीफ
केला - (19 जिले) बहराइच, बाराबंकी, फतेहपुर, गोरखपुर, कुशीनगर, लखनऊ, कौशांबी, प्रयागराज, महाराजगंज, देवरिया, अयोध्या, लखीमपुर खीरी, गोंडा, सीतापुर, शाहजहांपुर, कानपुर, बलरामपुर, बलिया व गाजीपुर।
मिर्च - (19 जिले) बाराबंकी, फतेहपुर, फिरोजाबाद, मुरादाबाद, उन्नाव, कौशांबी, वाराणसी, बदायूं, कानपुर नगर, बरेली, शाहजहांपुर, मिर्जापुर, लखीमपुर खीरी, कन्नौज, रायबरेली, आजमगढ़, बलिया, गाजीपुर, बलरामपुर।
पान - (07 जिले) उन्नाव, रायबरेली, बाराबंकी, महोबा, ललितपुर, हरदोई व लखनऊ।
रबी
टमाटर - (23 जिले) आगरा, बाराबंकी, एटा, अयोध्या, कानपुर नगर, मैनपुरी, उन्नाव, सीतापुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मिर्जापुर, अंबेडकरनगर, सोनभद्र, बलिया, फिरोजाबाद, शाहजहांपुर, हमीरपुर, कन्नौज, बलरामपुर, सहारनपुर, शामली, बुलंदशहर व हापुड़।
शिमला मिर्च -(05 जिले) फिरोजाबाद, मुरादाबाद, बदायूं, बरेली व शाहजहांपुर।
हरी मटर - (18 जिले) बाराबंकी, बस्ती, गोंडा, हमीरपुर, जालौन, झांसी, सुल्तानपुर, एटा, प्रयागराज, वाराणसी, देवरिया, बहराइच, फतेहपुर, गाजीपुर, बलिया, कासगंज, कानपुर नगर, कन्नौज।
आम - (14 जिले) सहारनपुर, मेरठ, बागपत, बुलंदशहर, अमरोहा, प्रतापगढ़, वाराणसी, लखनऊ, उन्नाव, सीतापुर, हरदोई, अयोध्या, बाराबंकी, बलरामपुर।